सीएम सुक्खू ने वर्चुअल संदेश से दिया एकता, सत्य और न्याय का संदेश; 35 से अधिक भारत-कनाडाई संगठनों के सहयोग से हुआ भव्य आयोजन
एएम नाथ। शिमला, 18 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं की गूंज कनाडा की राजधानी ओटावा स्थित पार्लियामेंट हिल में सुनाई दी, जहां विश्वविख्यात कुल्लू दशहरा का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से लोगों को संबोधित किया और हिमाचली प्रवासी ग्लोबल एसोसिएशन (एचपीजीए) को आयोजन के लिए बधाई दी। कार्यक्रम का आयोजन 35 से अधिक भारत-कनाडाई संगठनों के सहयोग से किया गया, जबकि ऑरलियन्स की सांसद मैरी-फ्रांस लालोंद ने इसकी मेजबानी की।
मुख्यमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाले भारतीय जिस उत्साह और श्रद्धा के साथ अपने त्योहारों, संस्कृति और परंपराओं को मनाते हैं, वह भारतीय मूल्यों तथा पीढ़ियों से चली आ रही ‘विविधता में एकता’ की गौरवशाली विरासत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विदेशों में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन भारत की पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है दशहरा
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने दशहरा पर्व के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। दशहरा लोगों को सत्य और न्याय के पक्ष में निर्भीकता से खड़े रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः अधर्म पर धर्म की ही विजय होती है।
उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कनाडा के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्थल पर इस पर्व का आयोजन हिमाचली समुदाय के लिए गर्व का विषय है। इससे प्रवासी हिमाचलियों, सामुदायिक नेताओं, संस्कृति प्रेमियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को एक मंच पर आने का अवसर मिला।
नाटी, झमाकड़ा और रामलीला ने मोहा मन
समारोह में हिमाचल प्रदेश की लोकसंस्कृति को प्रदर्शित करने वाली विभिन्न प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। पारंपरिक नाटी और झमाकड़ा लोकनृत्यों के साथ रामलीला के जीवंत मंचन ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू करवाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत-कनाडाई समुदाय की अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दिखाई दी। ऐसे आयोजन विदेशों में भारतीय परंपराओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करवाते हैं।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमाचली संस्कृति की प्रस्तुति प्रदेश की बढ़ती पहचान को दर्शाती है। हिमाचल के लोगों की प्रतिभा, कौशल और नेतृत्व क्षमता को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सम्मान मिल रहा है। इस प्रकार के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, आध्यात्मिक विरासत और परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
हिमाचली धाम से दिखी अतिथि-सत्कार की परंपरा
समारोह में हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक अतिथि-सत्कार संस्कृति की भी झलक देखने को मिली। आयोजकों ने अतिथियों को हिमाचली पारंपरिक व्यंजन परोसे। विशेष रूप से हिमाचली धाम ने लोगों को प्रदेश के विशिष्ट खानपान और पाक परंपराओं से परिचित करवाया।
मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति केवल लोकनृत्यों और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक खानपान, रीति-रिवाज और अतिथि-सत्कार भी किसी क्षेत्र की पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।
वैश्विक हिमाचली समुदाय को जोड़ने में एचपीजीए के प्रयासों की सराहना
मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचली प्रवासी ग्लोबल एसोसिएशन के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संगठन विदेशों में रहने वाले हिमाचलियों को एकजुट करने, प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने तथा हिमाचल और कनाडा में बसे समुदायों के बीच सार्थक संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक हैं। साथ ही, विदेशों में रह रहे हिमाचलियों को अपनी मातृभूमि के साथ सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंध बनाए रखने का अवसर भी मिलता है।
कनाडा के प्रधानमंत्री ने भी दी शुभकामनाएं
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी कुल्लू दशहरा के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कनाडा के बहुसांस्कृतिक स्वरूप को समृद्ध बनाने में सांस्कृतिक विविधता, सामुदायिक सहभागिता और भारत-कनाडाई समुदाय के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के अंत में एचपीजीए के निदेशक मंडल के सदस्यों भाग्य चंद्र, अरुण चौहान, विवेक नजर, संजीव ठाकुर, आशु कालिया और पूनम गुलरिया ने हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने, वैश्विक हिमाचली समुदाय के बीच आपसी संबंध मजबूत बनाने तथा प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, परंपराओं और मूल्यों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
