कानून बनने के बाद समीक्षा जरूरी, जनता से जुड़े संसद : पठानिया

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केपटाउन में गूंजी हिमाचल की आवाज, राष्ट्रमंडल सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया का संबोधन

69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष ने रखा पक्ष

राष्ट्रमंडल सम्मेलन में पठानिया ने उठाया जनता से विधायिका के जुड़ाव का मुद्दा

एएम नाथ। शिमला : दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। 13 से 17 सितंबर तक चल रहे सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों के साथ भारत के विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारी और संसदीय प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘बदलती विश्व व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय कानून और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना : राष्ट्रमंडल नेतृत्व’ है।
पठानिया ने 16 सितंबर को ‘कानून बनने के बाद समीक्षा : संसद को जनता से जोड़ना’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कानून बनने के बाद उसकी प्रभावशीलता की समीक्षा तथा जनता और विधायिका के बीच प्रभावी संवाद की आवश्यकता से जुड़े विषयों पर विचार रखे। इस सत्र में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण भी प्रमुख वक्ता रहे।
सम्मेलन में बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, कानून के शासन, संसदीय निगरानी और विधायी संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा की जा रही है। इसके अलावा समावेशी एवं निष्पक्ष व्यापार, असमानता और पिछड़ेपन को दूर करने, दिव्यांगजनों के लिए सुलभ संसद, जलवायु अनुकूलन, संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, मानवाधिकारों की रक्षा और शांति जैसे विषयों पर भी कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी, दिव्यांगजनों के प्रतिनिधित्व और छोटे विधायी निकायों की भूमिका पर भी अलग-अलग सत्र हो रहे हैं।
सम्मेलन से पहले पठानिया ने भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को ऐतिहासिक और बहुआयामी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक हितों और वैश्विक दक्षिण के प्रति समान प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। उन्होंने महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला की विरासत को दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया।
पठानिया ने भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच करीब 18 अरब अमेरिकी डॉलर के वार्षिक द्विपक्षीय वस्तु व्यापार और दक्षिण अफ्रीका में करीब 17 लाख भारतीय मूल के लोगों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया। सम्मेलन से पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की संसद के प्रांगण में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और राज्यों के पीठासीन अधिकारियों के साथ सामूहिक चित्र में हिस्सा लिया।

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