सुक्खू सरकार को लगा 40 हजार करोड़ का झटका
16वें वित्तायोग ने RDG ग्रांट की सिफारिश नहीं की
एएम नाथ। शिमला : रविवार का दिन देश के लिए मिला-जुला रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार का लगातार 9वां केंद्रीय बजट पेश किया। एक तरफ जहाँ आम आदमी को महंगाई से राहत देने के लिए कई चीजों के दाम घटाए गए हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के लिए यह बजट मायूसी लेकर आया है। सीतारमण ने अपने पिटारे से मोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और दवाओं को सस्ता करने का ऐलान किया, जिससे मिडिल क्लास के चेहरे खिल उठे हैं। लेकिन दूसरी तरफ, आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
दिल्ली से हिमाचल के लिए जो खबर आई है, उसने सुक्खू सरकार की नींद उड़ा दी है। हिमाचल प्रदेश को इस बजट से विशेष राहत पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन राहत तो दूर, पुराना सहारा भी छीन लिया गया है। दरअसल, 16वें वित्तायोग ने हिमाचल समेत छोटे राज्यों को दी जाने वाली राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी (RDG Grant) देने की सिफारिश नहीं की है। यह फैसला प्रदेश की आर्थिक रीढ़ तोड़ने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि राज्य पहले से ही भारी कर्ज और आपदाओं की मार झेल रहा है।
40 हजार करोड़ का झटका, कैसे चलेगा राज्य?
आंकड़ों पर नजर डालें तो यह झटका बहुत बड़ा है। 15वें वित्तायोग के दौरान हिमाचल को आरडीजी के रूप में 35 से 40 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जिससे राज्य के कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और विकास कार्य चलते थे। अब इस आर्थिक सहायता के बंद होने से राज्य को करीब 40 हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती का सीधा असर राज्य की विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को उम्मीद थी कि बजट में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए और कर्ज से राहत पाने के लिए केंद्र कोई विशेष घोषणा करेगा। लेकिन बजट भाषण खत्म होते ही हिमाचल के हाथ खाली रह गए। हालांकि बजट में कुछ राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं का जिक्र है, लेकिन हिमाचल की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के लिए कोई अलग पैकेज नहीं मिला। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस भारी-भरकम वित्तीय घाटे की भरपाई कैसे करती है, क्योंकि आरडीजी के बिना गाड़ी खींचना बेहद मुश्किल होने वाला है।
