गोवा ‘डिजिटल अरेस्ट’ केस में बड़ा खुलासा: साइबर ठगी का पैसा कैश से विदेशी मुद्रा में बदलता था नेटवर्क

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पणजी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गोवा के चर्चित ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में एजेंसी को एक ऐसे कथित संगठित नेटवर्क का पता चला है, जो साइबर ठगी से हासिल रकम को पहले नकद में बदलता था और फिर मनी चेंजर के जरिए उसे विदेशी मुद्रा में तब्दील किया जाता था।

ईडी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों ने 27,850 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग ट्रांजेक्शन किए हैं। इन कंपनियों के बैंक खातों से जुड़े मामलों में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 330 शिकायतें और 163 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

दो आरोपी गिरफ्तार, पांच दिन की ईडी हिरासत

ईडी के पणजी जोनल कार्यालय ने 23 अगस्त को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया। पीएमएलए की विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।

मामला नॉर्थ गोवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज उस एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें गोवा की एक महिला कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड का शिकार हुई थी।

वीडियो कॉल पर निगरानी का झांसा देकर 2.60 करोड़ ठगे

ईडी के मुताबिक, साइबर ठगों ने महिला को यह विश्वास दिलाया कि वह एक जांच के दायरे में है और उसे वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखा जा रहा है। इसके बाद उसे 21 मई 2025 से 2 जून 2025 के बीच अलग-अलग खातों में कुल 2,60,33,634 रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

पीड़िता को इन खातों को कथित तौर पर ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स’ बताया गया था।

साइबर फ्रॉड के पैसे को कैश और विदेशी मुद्रा में बदलने का नेटवर्क

जांच में ईडी को पता चला कि ठगी की रकम केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसे एक कथित संगठित वित्तीय नेटवर्क में भेजा गया। जांच एजेंसी के अनुसार, साइबर फ्रॉड से बैंकिंग सिस्टम में जमा होने वाली रकम को पहले कैश में बदला जाता था और फिर विदेशी मुद्रा में परिवर्तित किया जाता था।

इसके लिए ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है, जिनके पास रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से ‘फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर’ (FFMC) का लाइसेंस था।

ईडी के अनुसार, पीड़िता की रकम कुछ ही घंटों में नए या निष्क्रिय बैंक खातों की कई परतों से होकर गुजरी। इसके बाद ट्रांसफर, नकद निकासी, सेल्फ-चेक और पेमेंट गेटवे के माध्यम से रकम को 400 से अधिक लाभार्थी खातों में बांटा गया।

जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी को कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़ी कंपनियों के एक कथित आपस में जुड़े समूह का भी पता चला।

2,904 करोड़ रुपये से अधिक नकद जमा

ईडी के अनुसार, नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों ने कुल 27,850 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग लेन-देन किए। इनमें करीब 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि 584.70 करोड़ रुपये करीब 61,448 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीनों से जमा किए गए। एजेंसी का कहना है कि नकदी के लेन-देन का यह पैमाना और तरीका सामान्य कारोबार से अलग था।

20 राज्यों में 330 शिकायतें और 163 एफआईआर

ईडी के मुताबिक, इन कंपनियों के बैंक खातों से जुड़े मामलों में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 330 शिकायतें और 163 एफआईआर दर्ज हैं। इन मामलों में कुल 417.49 करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई है।

जांच में यह भी पाया गया कि 101 शिकायतों में एक ही साइबर धोखाधड़ी के दौरान पीड़ित का पैसा उसी समूह से जुड़ी दो या उससे अधिक कंपनियों के खातों में भेजा गया। इससे एजेंसी को आशंका है कि ये खाते अलग-अलग कारोबारी गतिविधियों के बजाय एक कॉमन पूल की तरह इस्तेमाल किए जा रहे थे।

कर्मचारियों और ड्राइवरों के नाम पर बनाई गईं कंपनियां

जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। ईडी के अनुसार, कथित नेटवर्क में इस्तेमाल की गई कुछ कंपनियां कम आय वाले कर्मचारियों, ड्राइवरों और छोटे आवासों में रहने वाले लोगों के नाम पर बनाई गई थीं।

कागजों में इन्हें कंपनियों का डायरेक्टर बताया गया था, लेकिन जांच एजेंसी के मुताबिक बैंक खातों और वास्तविक कारोबारी गतिविधियों का नियंत्रण अन्य लोगों के हाथ में था।

मुंबई और गोवा में 20 ठिकानों पर छापेमारी

ईडी ने जुलाई में मुंबई और गोवा में 20 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में 3.25 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए। इसके अलावा 30 करोड़ रुपये से अधिक बैलेंस वाले कथित सिंडिकेट खातों को फ्रीज किया गया है।

जांच एजेंसी ने डिजिटल डिवाइस, बैंकिंग रिकॉर्ड, अकाउंट बुक्स और कानूनी रजिस्टर समेत अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं। इनकी जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।

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