गोविंद सागर एवं कोलडैम जलाशयों में मत्स्य विभाग का विशेष निरीक्षण अभियान : अवैध मत्स्य गतिविधियों पर विभाग ने की सख्त कार्रवाई, कई मामले दर्ज

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बिलासपुर, 19 मई: मत्स्य संपदा के संरक्षण तथा जलाशयों में अवैध मत्स्य गतिविधियों की रोकथाम के उद्देश्य से मत्स्य विभाग, मंडल बिलासपुर द्वारा गोविंद सागर एवं कोलडैम जलाशयों में विशेष निरीक्षण एवं गश्त अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 16 एवं 17 मई को विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर कई अवैध गतिविधियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई।
मत्स्य अधिकारी जकातखाना सुरम सिंह एवं उनकी टीम ने गत 17 मई को गोविंद सागर जलाशय के बडडू, लुरहाड़ तथा दाड़ीभाड़ी क्षेत्रों में गश्त के दौरान लगभग 21 किलोग्राम अंडर साईज जाल जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त 16 मई को गोविंद सागर जलाशय के बागछाल क्षेत्र में अवैध मत्स्य शिकार का एक मामला पकड़ा, जिसमें 500 रुपये जुर्माना एवं मुआवजा राशि के रूप में वसूल किए गए।
इसी तरह कोलडैम जलाशय क्षेत्र में भी विभाग द्वारा रात्रि गश्त के दौरान कड़ी कार्रवाई की गई। मत्स्य क्षेत्रीय सहायक सुन्नी हरीश कुमार ने रात्रि निरीक्षण के दौरान सुन्नी क्षेत्र के समीप अवैध मछली परिवहन के तीन मामले पकड़े, जिनमें 10 हजार रुपये मुआवजा राशि प्राप्त की गई। साथ ही लगभग 20 किलोग्राम अवैध मछली खराब होने के कारण नियमानुसार नष्ट की गई।
इसी प्रकार 16 मई को मत्स्य अधिकारी मंदली विवेक कमल एवं उनकी टीम ने गोविंद सागर जलाशय के बीट नंबर-1 में निरीक्षण के दौरान खोली तथा बालू क्षेत्र से लगभग 30 किलोग्राम अंडर साईज गिल नेट जब्त किए गए। वहीं, मत्स्य क्षेत्रीय सहायक अभिनीत ने सीर खड्ड क्षेत्र में गश्त के दौरान अवैध मत्स्य शिकार के दो मामले पकड़े, जिनमें 1500 रुपये मुआवजा राशि प्राप्त की गई तथा लगभग 7 किलोग्राम मछली की नीलामी कर 600 रुपये राजस्व के रूप में प्राप्त हुई।
सहायक निदेशक मत्स्य, मंडल बिलासपुर पंकज ठाकुर ने बताया कि गोविंद सागर जलाशय में 46 तथा कोलडैम जलाशय में 4 मत्स्य सहकारी सभाओं के माध्यम से 2500 से अधिक मछुआरे मत्स्य आखेट का कार्य कर रहे हैं। विभाग द्वारा प्रतिवर्ष जलाशयों में लाखों की संख्या में मत्स्य बीज संग्रहण किया जाता है, ताकि मछुआरों को पर्याप्त मात्रा में मछली उपलब्ध हो सके।
उन्होंने बताया कि विभाग के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2024-25 में गोविंद सागर जलाशय के मत्स्य उत्पादन में वर्ष 2023-24 की तुलना में 156.33 मीट्रिक टन तथा वर्ष 2025-26 में वर्ष 2024-25 की तुलना में 56.45 मीट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष मत्स्य प्रजनन अवधि 16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्य आखेट पूर्णतः प्रतिबंधित रहता है तथा इस दौरान सक्रिय मछुआरों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े और मछलियां प्राकृतिक रूप से प्रजनन कर सकें। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तियों द्वारा अंडर साइज जालों तथा अवैध मत्स्य शिकार जैसी गतिविधियों से विभाग के संरक्षण प्रयास प्रभावित होते हैं, जिसका प्रतिकूल प्रभाव भविष्य में मत्स्य उत्पादन एवं संसाधनों पर पड़ सकता है।
निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य, हिमाचल प्रदेश विवेक चंदेल ने कहा कि जलाशयों में अवैध मत्स्य गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने मछुआरों एवं स्थानीय लोगों से मत्स्य नियमों का पालन करने तथा जलाशयों की मत्स्य संपदा के संरक्षण में विभाग का सहयोग करने की अपील की।
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