पौधारोपण परियोजना के नाम पर करीब 64 लाख 3 हजार 560 रुपये की राशि के दुरुपयोग का आरोप
भ्रष्टाचार के मामले ने पंचायत व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया
एएम नाथ। चम्बा : जिला चम्बा के विकास खंड तीसा की ग्राम पंचायत सनवाल में सामने आए बड़े भ्रष्टाचार के मामले ने पंचायत व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। मनरेगा मद के तहत किए गए कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए पंचायत प्रधान, उपप्रधान और छह वार्ड सदस्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में उपायुक्त चम्बा मुकेश रेप्सवाल ने आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। प्रशासनिक जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि मनरेगा के अंतर्गत पौधारोपण परियोजना के नाम पर करीब 64 लाख 3 हजार 560 रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया। एसडीएम चुराह द्वारा की गई जांच में पाया गया कि सरकारी धन का उपयोग नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए किया गया, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। उपायुक्त मुकेश रेप्सवाल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि प्रधान और अन्य पदाधिकारी पद पर बने रहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत चल रही जांच प्रभावित हो सकती है। साथ ही साक्ष्यों को नष्ट करने और सरकारी अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर पंचायत प्रधान मोहन लाल, उपप्रधान और छह वार्ड सदस्यों को निलंबित करने का निर्णय लिया गया। आदेश में यह भी उल्लेख है कि प्रधान मोहन लाल को इस मामले में 23 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह 14 दिनों से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहे। प्रशासन द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में भी पंचायत पदाधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगने के बावजूद 7 जनवरी 2026 तक कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि 8 जनवरी को दिया गया उत्तर तथ्यों के विपरीत पाया गया। उपायुक्त ने प्रधान और उपप्रधान को निर्देश दिए हैं कि वे पंचायत की मोहर, चल-अचल संपत्ति और सभी दस्तावेज तत्काल पंचायत सचिव को सौंपें। यह कार्रवाई जिले की अन्य पंचायतों के लिए भी एक कड़ा और स्पष्ट संदेश मानी जा रही है।
