स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश
एएम नाथ। चम्बा : ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला मुख्यालय चम्बा में उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में कचरा संग्रहण, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, परिवहन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 एक अप्रैल 2026 से प्रभावी हैं। इनका दायरा शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के साथ-साथ सरकारी, निजी, वाणिज्यिक और संस्थागत क्षेत्रों तक विस्तारित है।
उपायुक्त ने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायतों में ऐसे क्लस्टर चिन्हित किए जाएं, जहां आबादी अधिक होने के कारण सफाई और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता ज्यादा है। उन्होंने इन क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार प्लास्टिक कचरा संग्रहण केंद्र स्थापित करने तथा एकत्रित प्लास्टिक कचरे को निर्धारित वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तक पहुंचाने के निर्देश दिए। जिन क्षेत्रों में प्लांट उपलब्ध नहीं हैं, वहां कचरे को नजदीकी अधिकृत संग्रहण अथवा प्रसंस्करण केंद्र तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा।
उपायुक्त ने पंचायत स्तर पर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण तथा कचरे के संग्रहण और निस्तारण का नियमित रिकॉर्ड रखने पर विशेष जोर दिया। साथ ही पंचायतवार अद्यतन डाटा तैयार करने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी सभी सूचनाएं वास्तविक एवं सत्यापित रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने जैव-अवक्रमणीय और पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा। विशेष रूप से प्लास्टिक प्लेटों और अन्य एकल-उपयोग प्लास्टिक के स्थान पर पत्तल जैसे पर्यावरण हितैषी विकल्पों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त अमित मेहरा, जिला विकास अधिकारी तिवेन्द्र चिनोरिया, अर्थशास्त्री ग्रामीण विकास विनोद कुमार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि विभिन्न विकास खंडों के खंड विकास अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।
