चूक नहीं, चौका मारना है, रवनीत बिट्टू के हाथ बीजेपी ने खोले, कांग्रेस की नाक में दम करने का दिया टास्क

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चंडीगढ़ : पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। बीजेपी की नजर सिख जाट वोटरों पर भी है। पहले सरदार केवल सिंह ढिल्लों को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी दे दी।

ढिल्लों प्रदेश अध्यक्ष बनने वाले पहले जाट सिख नेता हैं। अब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से मुकाबले के लिए अपने नेताओं को मोर्चे पर खड़ा किया है। कांग्रेस पर हमलों के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू की जिम्मेदारी दी है। बिट्टू भी सिख जाट हैं और वह पंजाब के पूर्व सीएम सरदार बेअंत सिंह के पोते हैं। बिट्टू मार्च 2024 को बीजेपी में शामिल हुए थे।

राहुल गांधी को आतंकवादी बता चुके हैं रवनीत बिट्टू

भगवा पार्टी में आने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस के निशाने पर आए, फिर उन्होंने पलटवार से कांग्रेस नेताओं को असहज किया। सितंबर 2024 में उन्होंने राहुल गांधी देश का नंबर वन आतंकवादी बताकर चौंका दिया था। जब उन्हें संसद में राहुल गांधी ने गद्दार दोस्त कहा, तब भी बिट्टू ने सीधे गांधी परिवार को निशाने पर लिया। फरवरी 2026 में संसद के मकर द्वार पर हुए विवाद के बाद भी उन्होंने राहुल गांधी को देश का दुश्मन बताया था। उनके एक बयान पर भी काफी हंगामा मचा था, जिसमें उन्होंने कहा कि वे गांधी परिवार के किसी ऐसे सदस्य से हाथ नहीं मिलाएंगे, जिसकी पार्टी और परिवार का इतिहास सिखों के खिलाफ दमन, स्वर्ण मंदिर पर कार्रवाई का गवाह रहा है।

राजा वड़िंग और रंधावा विवाद में गांधी फैमिली को लपेटा

केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद रवनीत बिट्टू पूरी तरह से पंजाब विधानसभा चुनाव में जुट चुके हैं। अब उन्होंने कांग्रेस की एक परिवार, एक टिकट के नीति पर कमेंट किया है। कांग्रेस के भीतर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान में उन्होंने रंधावा का समर्थन किया है। राजा वड़िंग ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का फॉर्मूला दिया था। रंधावा ने कहा है कि अगर किसी परिवार में चार ऐसे काबिल उम्मीदवार हैं जो चुनाव जीत सकते हैं, तो कांग्रेस उन चारों को टिकट क्यों नहीं दे सकती? टिकट बंटवारे का आधार पारिवारिक संबंध नहीं, बल्कि चुनावी क्षमता होनी चाहिए। कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा के बयान को लपकते हुए रवनीत सिंह बिट्टू ने एक बार फिर कांग्रेस परिवार को लपेट लिया। उन्होंने कहा कि अगर गांधी परिवार के तीन सदस्यों को चुनाव टिकट मिल सकते हैं, तो किसी दूसरे परिवार को क्यों नहीं, जिसके पास चार ऐसे उम्मीदवार हों जो जीत सकते हैं?

वंदे मातरम और दिमागी नक्सली विवाद में तीखी टिप्पणी

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम विवाद में भी रवनीत सिंह बिट्टू ने गांधी फैमिली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इन बातों को आसानी से नहीं समझते, लेकिन माता जी (सोनिया गांधी) जल्दी समझ जाती हैं। उन्होंने सोचा कि यह कांग्रेस का एजेंडा नहीं है। यह संसद से पास हुआ देश का एजेंडा है। जो चीज उन्होंने संसद में पास नहीं की, उसे उनके सामने कैसे पेश किया जा सकता है? यह गांधी परिवार है। उनके लिए जनता, संसद और लोकतंत्र की कोई अहमियत नहीं है। दिमागी नक्सल को लेकर पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बयान पर भी बिट्टू ने कांग्रेस को घेरा। बिट्टू ने उन्हें दिमागी नक्सलों का हेडमास्टर बताया। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ लड़ने के लिए रवनीत बिट्टू के हाथ खोल दिए हैं। उन्हें विधानसभा चुनाव में जालंधर कैंट या लुधियाना से मैदान उतार सकती है। जालंधर कैंट से उनके दादा बेअंत सिंह चुनाव जीते थे। खुद बिट्टू आनंदपुर साहिब और लुधियाना के सांसद रहे हैं।

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