जिला बिलासपुर के विकास के लिए 1625.83 करोड़ रूपए की ऋण क्षमता निर्धारित, नाबार्ड का ऋण रोडमैप किया जारी

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डीसी राहुल कुमार ने नाबार्ड की संभाव्यतायुक्त ऋण योजना का किया विमोचन

एएम नाथ । बिलासपुर, 29 जनवरी: जिला बिलासपुर की आर्थिक प्रगति और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उपायुक्त राहुल कुमार ने आज वर्ष 2026-27 के लिए नाबार्ड द्वारा तैयार ‘संभाव्यतायुक्त ऋण योजना’ का आधिकारिक विमोचन किया। इस व्यापक वित्तीय दस्तावेज में जिला के विकास के लिए कुल 1625.83 करोड़ की ऋण क्षमता का आकलन किया गया है। निर्धारित लक्ष्यों के अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए 714.74 करोड़, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए 771.35 करोड़ तथा अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे आवास, शिक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 139.74 करोड़ आवंटित करने का प्रावधान किया गया है। संभाव्यतायुक्त ऋण योजना का विमोचन करते हुए उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि यह ऋण योजना भारतीय रिजर्व बैंक के मानकों और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध होगी। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में परिसंपत्ति निर्माण और स्थायी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने वित्तीय संस्थानों और बैंकों से अपनी ऋण प्रवाह प्रक्रियाओं को और अधिक सक्रिय बनाने का आह्वान किया ताकि जिला के किसानों और उद्यमियों को समयबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके। राहुल कुमार ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए तैयार संभाव्यतायुक्त ऋण योजना के अंतर्गत जिला बिलासपुर में कृषि क्षेत्र के फसल उत्पादन, रखरखाव एवं विपणन के लिए 465.67 करोड़ रूपए, जल संसाधन विकास हेतु 16.93 करोड़ रूपए, कृषि यंत्रीकरण के लिए 21.27 करोड़ रूपए, बागवानी, पौधारोपण एवं सेरीकल्चर के लिए 30.04 करोड़ रूपए, वानिकी एवं बंजर भूमि विकास के लिए 5.71 करोड़ रूपए तथा अन्य कृषि गतिविधियों के लिए ऋण प्रावधान शामिल है। कृषि अवसंरचना क्षेत्र के लिए कुल 16.80 करोड़ रूपए का ऋण प्रावधान किया गया है, जिसमें भंडारण संरचनाओं के निर्माण के लिए 5.65 करोड़ रूपए, भूमि विकास, मृदा संरक्षण एवं बंजर भूमि विकास के लिए 9.75 करोड़ रूपए तथा अन्य कृषि अवसंरचना गतिविधियों के लिए 1.39 करोड़ रूपए शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सहायक गतिविधियों के अंतर्गत खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण के लिए 10.16 करोड़ रूपए तथा अन्य सहायक गतिविधियों के लिए 2.34 करोड़ रूपए की ऋण क्षमता आंकी गई है, जिससे कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा। पशुपालन क्षेत्र के अंतर्गत डेयरी गतिविधियों के लिए 116.68 करोड़ रूपए, पोल्ट्री के लिए 7.49 करोड़ रूपए, भेड़-बकरी एवं सुअर पालन के लिए 6.52 करोड़ रूपए तथा मत्स्य पालन के लिए 11.61 करोड़ रूपए की ऋण क्षमता निर्धारित की गई है, जिससे ग्रामीण आय और आजीविका सृजन को बढ़ावा मिलेगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए कुल 771.35 करोड़ रूपए की ऋण क्षमता निर्धारित की गई है। इसमें विनिर्माण क्षेत्र के लिए कार्यशील पूंजी ऋण के रूप में 432.00 करोड़ रूपए, टर्म लोन के अंतर्गत 337.28 करोड़ रूपए, जबकि अन्य एमएसएमई गतिविधियों के लिए 2.07 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। प्राथमिकता क्षेत्र के अन्य घटकों में शिक्षा के लिए 0.56 करोड़ रूपए, आवास क्षेत्र के लिए 16.01 करोड़ रूपए, सामाजिक अवसंरचना के लिए 75.81 करोड़ रूपए, नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 3.06 करोड़ रूपए, अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए 6.05 करोड़ रूपए तथा निर्यात ऋण के अंतर्गत 38.24 करोड़ रूपए की ऋण क्षमता का आकलन किया गया है। इस प्रकार वर्ष 2026-27 के लिए जिला बिलासपुर में कुल 1625.83 करोड़ रूपए की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता निर्धारित की गई है, जो जिला के समग्र आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी। उपायुक्त ने विभिन्न विभागों और बैंक प्रबंधन को निर्देश दिए कि वह संयुक्त रूप से विशेष जागरूकता शिविरों का आयोजन करें ताकि जनमानस को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं की व्यापक जानकारी मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन ऋण अनुमानों को धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं ताकि जिला की आर्थिक क्षमता का पूर्ण दोहन किया जा सके। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत ठाकुर सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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