जोगिंद्रा बैंक की पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल, जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप

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आरटीआई में जांच रिपोर्ट और अंतिम स्थिति रिपोर्ट नहीं मिलने का आरोप

नाबार्ड से स्वतंत्र सतर्कता जांच, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

एएम नाथ। शिमला/सोलन :  जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सोलन से जुड़े पदोन्नति और शिकायतों के मामले में अभिलेखों को कथित रूप से दबाने के आरोप सामने आए हैं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने नाबार्ड के मुख्य सतर्कता अधिकारी को शिकायत भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र सतर्कता जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरटीआई के माध्यम से मांगी गई महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट और अंतिम स्थिति रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 29 जुलाई 2026 को आरटीआई आवेदन देकर 19 सितंबर 2022 को बैंक में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से संबंधित अभिलेख मांगे थे। इसमें बयान, संलग्नक, आदेश, अनुमतियां, स्वीकृतियां, बोर्ड कार्यवाही के साथ-साथ 31 मई 2026 की शिकायत पर तैयार विस्तृत जांच रिपोर्ट और अंतिम स्थिति रिपोर्ट भी शामिल थी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि 1 सितंबर को मिले आरटीआई जवाब में केवल पहले बिंदु की सूचना दी गई, जबकि दूसरे बिंदु पर न तो सूचना दी गई और न ही सूचना रोकने का कोई कारण अथवा वैधानिक आधार बताया गया। इसके बाद उन्होंने प्रथम अपील दायर की।
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नाबार्ड के निर्देश के बाद भी रिपोर्ट नहीं मिलने का दावा
शिकायत में उल्लेख है कि 31 मई 2026 को नाबार्ड के समक्ष पूर्व शिकायतों पर कार्रवाई न होने और तथ्यों को दबाने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद 26 जून 2026 को नाबार्ड, शिमला ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत की जांच कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट शिकायतकर्ता और नाबार्ड कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्धारित अवधि के बाद भी उन्हें जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि जांच रिपोर्ट बैंक के प्रबंध निदेशक के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की जानकारी मिली, लेकिन उसकी प्रति उन्हें अथवा नाबार्ड को उपलब्ध नहीं कराई गई।
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स्वतंत्र जांच और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

एडवोकेट मुकेश कुमार शर्मा ने नाबार्ड से मूल शिकायत की फाइल, जांच कार्यवाही, विस्तृत जांच रिपोर्ट और अंतिम स्थिति रिपोर्ट तलब करने की मांग की है। साथ ही यह पता लगाने का अनुरोध किया है कि जांच कब और किस अधिकारी ने की तथा रिपोर्ट किसे सौंपी गई।
शिकायत में संबंधित भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सुरक्षित रखने तथा कथित मिलीभगत, पद के दुरुपयोग और सूचना रोकने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने आग्रह किया है कि जांच ऐसे अधिकारियों को न सौंपी जाए जिनका आचरण शिकायत के दायरे में है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

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