डल्लेवाल के खिलाफ बगावत से दो हिस्सों में बंटी BKU

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नई दिल्ली: किसान आंदोलन 2.0 के चेहरे जगजीत सिंह डल्लेवाल को बड़ा झटका लगा है. पंजाब की सियासत और किसान राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली भारतीय किसान यूनियन (एकता-सिद्धपुर) अब दो गुटों में बंट गई है।

संगठन के भीतर उठे असंतोष ने खुले विद्रोह का रूप ले लिया है, जिससे किसान मोर्चे की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को हुई एक अहम बैठक के बाद संगठन में फूट औपचारिक रूप से सामने आ गई. आठ जिलों के अध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने डल्लेवाल के नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें संगठन प्रमुख मानने से इनकार कर दिया और नई कमान संभालने का ऐलान कर दिया।

भारतीय किसान यूनियन (एकता-सिद्धपुर) में बगावत : पटियाला के पास बहादरगढ़ में आयोजित बैठक के बाद बागी गुट ने मौजूदा अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल पर गंभीर आरोप लगाए. असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि संगठन को लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चलाया जा रहा था और फैसले एकतरफा लिए जा रहे थे।

दलबीर सिंह सिद्धपुर बने नए संयोजक

बगावत करने वाले गुट ने संगठन के संस्थापक पिशोरा सिंह सिद्धपुर के बेटे दलबीर सिंह सिद्धपुर को नया संयोजक घोषित किया. उनके समर्थन में संगठन के कई जिलों के पदाधिकारी खुलकर सामने आ गए हैं।

डल्लेवाल पर तानाशाही रवैये के आरोप

बागी नेताओं का आरोप है कि डल्लेवाल संगठन को तानाशाही तरीके से चला रहे थे.उनका कहना है कि पिछले छह वर्षों से संगठन के चुनाव नहीं कराए गए, जबकि नियमों के अनुसार हर तीन साल में चुनाव होना अनिवार्य है।

शंभू-खनौरी बॉर्डर मोर्चे पर भी सवाल

दलबीर सिंह सिद्धपुर ने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) से अलग होकर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर मोर्चा लगाने के फैसले को गलत बताया. उन्होंने दावा किया कि सालभर चले आंदोलन में कई किसानों की जान गई और बड़ी संख्या में ट्रैक्टर व अन्य सामान चोरी हो गया, जिसका अब तक कोई सुराग नहीं मिला।

सवाल उठाने वालों को संगठन से बाहर करने का आरोप

बागी गुट का आरोप है कि जिन पदाधिकारियों ने डल्लेवाल के फैसलों पर सवाल खड़े किए, उन्हें संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. इससे संगठन के भीतर असंतोष और गहराता चला गया।

कौन हैं जगजीत सिंह डल्लेवाल?

जगजीत सिंह डल्लेवाल किसान आंदोलन 2.0 के सबसे प्रमुख चेहरों में रहे हैं.उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर 26 नवंबर से 9 अप्रैल तक 131 दिनों का लंबा अनशन किया था.खनौरी बॉर्डर पर चले आंदोलन का नेतृत्व भी उन्होंने ही किया।

नए चुनाव की तैयारी, दोनों गुट आमने-सामने

बागी गुट ने संगठन में नए चुनाव कराने के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है.वहीं डल्लेवाल गुट फिलहाल खामोश है. उनके करीबी नेता काका सिंह कोटरा ने संगठन में किसी भी तरह की फूट से इनकार किया है.सूत्रों के मुताबिक, डल्लेवाल गुट बुधवार को जालंधर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों का जवाब दे सकता है।

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