दीवान ने पीएसईआरसी से पंजाब उद्योग को बिजली दरों के झटके से बचाने की अपील….कहा: टैरिफ में स्थिरता और सुधार जरूरी

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लुधियाना, 21 जनवरी: पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़ी कई चुनौतियों के दबाव में जूझ रहे लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्र की आवाज उठाते हुए, जिला कांग्रेस कमेटी लुधियाना (शहरी) के पूर्व अध्यक्ष और पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पवन दीवान ने पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन को एक औपचारिक पत्र भेजकर आगामी टैरिफ फ्रेमवर्क के माध्यम से उद्योगों को तत्काल राहत देने की मांग की है।

दीवान ने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले लुधियाना के हजारों एमएसएमई और बड़े उद्योग अत्यधिक बिजली दरों के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने पीएसईआरसी के चेयरमैन विश्वजीत खन्ना का ध्यान औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े अहम मुद्दों की लगातार हो रही अनदेखी की ओर दिलाया और बताया कि इसके चलते कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं, जबकि अनेक अन्य उन राज्यों की ओर पलायन कर रही हैं, जहां उद्योग-हितैषी और प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए प्रोत्साहन दिए जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह पलायन न केवल लाखों श्रमिकों की आजीविका को खतरे में डाल रहा है, बल्कि पंजाब की एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में पहचान को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

दीवान ने जोर देते हुए, कहा कि पीएसईआरसी द्वारा वित्त वर्ष 2026–27 के लिए बिजली टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया शुरू किए जाने के साथ ही यह समय औद्योगिक क्षेत्र के तात्कालिक मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिए उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि लुधियाना का उद्योग पहले से ही कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, परिवहन से जुड़ी चुनौतियों और अंतर-राज्यीय प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है। ऐसे नाजुक हालात में बिजली दरों में कोई भी बड़ा या असमान बढ़ोतरी असहनीय होगी। इसलिए आयोग को संतुलित और न्यायोचित दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।

इस पत्र में दीवान ने औद्योगिक विश्वास को पुनर्जीवित करने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत स्पष्टता की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कम से कम पांच वर्षों के लिए स्थिर औद्योगिक टैरिफ संरचना लागू करने की मांग करते हुए कहा कि ऐसी स्थिरता रणनीतिक योजना, लागत प्रबंधन और सतत विकास के लिए निर्णायक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिस्पर्धी औद्योगिक टैरिफ कोई रियायत नहीं, बल्कि पंजाब की आर्थिक मजबूती, रोजगार सृजन और औद्योगिक लचीलापन सुनिश्चित करने में एक दूरदर्शी निवेश है।

इसी तरह, उद्योगों के लंबित मुद्दों पर बात करते हुए दीवान ने क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज में चरणबद्ध और पारदर्शी कमी की लंबे समय से चली आ रही वैध मांग को तत्काल और ईमानदारी से पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयोग को न्यूनतम लागत पर बिजली खरीद की रणनीति अपनानी चाहिए, जिसे एटी एंड सी घाटे में कमी के लिए स्पष्ट और समयबद्ध लक्ष्यों से जोड़ा जाए। इसके अलावा, हर रुपये के निवेश से बिजली की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में मापनीय सुधार दिखाई देना चाहिए।

नीतिगत मुद्दों से आगे बढ़ते हुए दीवान ने जमीनी स्तर पर मौजूद गंभीर परिचालन समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि बिना घोषित बिजली कटौती, फीडर ट्रिपिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और सब-स्टेशनों पर तकनीकी स्टाफ की भारी कमी ने औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता को बुरी तरह प्रभावित किया है। ये व्यवधान न केवल उत्पादकता को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि निवेशकों के विश्वास को भी कमजोर कर रहे हैं।

इसके अलावा, उन्होंने पावर क्वालिटी (पीक्यू) मीटरों से जुड़े गहराते संकट पर भी गंभीर चिंता जताई। दीवान ने कहा कि देशव्यापी कमी और सीमित विक्रेता उपलब्धता के कारण अत्यधिक कीमतों के बावजूद उद्योगों पर गैर-अनुपालन के लिए जुर्माने लगाए जा रहे हैं, जो न्यायसंगत नहीं है। ऐसे में पीएसईआरसी को पीक्यू मीटर से संबंधित दंडात्मक कार्रवाई पर तत्काल मोराटोरियम देना चाहिए।

दीवान ने आयोग से “क्लीन पोल पॉलिसी” अपनाने की भी अपील की, ताकि अवैध तृतीय-पक्ष केबलों को हटाकर ढांचागत सुरक्षा और सेफ्टी जोखिमों को कम किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने विशेष रूप से सब-स्टेशनों पर तकनीकी कर्मियों की भारी कमी को दूर करने के लिए तत्काल भर्ती अभियान शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि स्टाफ की कमी सीधे तौर पर सेवा की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रही है।

पत्र के अंत में दीवान ने पीएसईआरसी से आग्रह किया कि बिजली उपयोगिता की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए पंजाब के औद्योगिक ढांचे की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।

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