लुधियाना, 1 नवंबर: जिला कांग्रेस कमेटी, लुधियाना (शहरी) के पूर्व अध्यक्ष एवं पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पवन दीवान ने आरोप लगाया है कि राजस्व मंत्री के आवास से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित ट्रांसपोर्ट नगर का तहसील कार्यालय कथित भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित नियमों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए, बिना एनओसी के ही संपत्तियों की रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर ऐसी रजिस्ट्रियां अवैध लेन-देन के बदले की जा रही हैं। इस मामले की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच करवाने की मांग करते हुए, दीवान ने दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दीवान ने मामले पर विस्तार से बात करते हुए, कहा कि जब से सरकार ने यह छूट दी है कि संपत्ति की स्थिति चाहे किसी भी तहसील के अधिकार क्षेत्र में आती हो, उसकी रजिस्ट्री किसी भी तहसील में करवाई जा सकती है, तब से ट्रांसपोर्ट नगर स्थित तहसील कार्यालय में लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है और ज्यादातर संपत्तियों की रजिस्ट्रियां यहीं की जा रही हैं। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि इससे न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है, बल्कि असाधारण भीड़ भी बढ़ गई है, जिसके कारण लोगों को अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री करवाने के लिए दो-दो महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
दीवान ने आरोप लगाया कि संबंधित तहसील कार्यालय में तैनात अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए कथित तौर पर संपत्तियों की रजिस्ट्रियां करवाने में मदद कर रहे हैं। इनमें वे मामले भी शामिल हैं, जहां अनिवार्य एनओसी प्राप्त नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां न केवल संपत्तियों के लेन-देन से संबंधित नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि इससे सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान हो सकता है।
दीवान ने कहा कि बड़े स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि कुछ अधिकारियों को अवैध राशि देकर बिना एनओसी वाली संपत्तियों की रजिस्ट्रियां करवाई जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की गहन, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदारी तय की जा सके।
दीवान ने इस स्थिति को बड़ी विडंबना करार देते हुए, कहा कि एक तरफ अनिवार्य एनओसी के बिना संपत्तियों की रजिस्ट्रियां कथित तौर पर बिना किसी रोक-टोक के की जा रही हैं। जबकि दूसरी तरफ उन आवेदकों के मामलों में अक्सर आपत्तियां लगा दी जाती हैं, जिन्होंने सभी निर्धारित शर्तें पूरी की होती हैं और नियमों का पालन किया होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी मनमानी कार्यप्रणाली न केवल कानून का पालन करने वाले नागरिकों को बेवजह परेशान करती है, बल्कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता, एकरूपता और निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
दीवान ने पंजाब सरकार से मांग की कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुई सभी संपत्तियों की रजिस्ट्रियों की जांच के लिए व्यापक और समयबद्ध जांच के आदेश दिए जाएं, ताकि पता लगाया जा सके कि किन-किन संपत्तियों की रजिस्ट्रियां अनिवार्य एनओसी के बिना की गई हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अनियमितता में शामिल पाए जाने वाले प्रत्येक अधिकारी या व्यक्ति के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
दीवान ने यह भी मांग की कि एक मजबूत निगरानी प्रणाली स्थापित की जाए, ताकि प्रत्येक संपत्ति की रजिस्ट्री निर्धारित नियमों के अनुसार और एनओसी सहित सभी अनिवार्य मंजूरियों की पूरी जांच के बाद ही की जा सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन भी सौंपेगा।
