7.5 लाख विद्यार्थियों तक जागरूकता अभियान पहुंचाने के फैसले पर बोले बाजवा- जागरूकता जरूरी, लेकिन बड़े तस्करों और सप्लायरों पर कार्रवाई के बिना नशे पर नहीं लगेगी लगाम
चंडीगढ़। पंजाब में बढ़ते नशे के संकट को लेकर नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है। पंजाब शिक्षा विभाग की ओर से 3,600 से अधिक सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के 7.5 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों तक नशा विरोधी जागरूकता अभियान पहुंचाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बाजवा ने कहा कि जागरूकता जरूरी है, लेकिन केवल प्रचार अभियानों से नशे के कारोबार पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
बाजवा ने कहा कि सरकार को जागरूकता अभियानों के साथ-साथ नशे की सप्लाई चेन तोड़ने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल के बावजूद पंजाब में नशे की उपलब्धता पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में चिट्टे की होम डिलीवरी जैसी शिकायतें सामने आना सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है। पुलिस को छोटे स्तर के मामलों तक सीमित रहने के बजाय बड़े तस्करों, सप्लायरों और पूरे नेटवर्क तक पहुंचकर कार्रवाई करनी चाहिए।
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल
बाजवा ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने तक सीमित नहीं हो सकती। प्रभावी पुलिस कार्रवाई, बड़े तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और नशे की गिरफ्त में आए लोगों के बेहतर पुनर्वास पर एक साथ काम करने की जरूरत है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कितने बड़े ड्रग नेटवर्क ध्वस्त किए गए, कितने प्रमुख तस्कर गिरफ्तार हुए और गांवों व कस्बों तक नशे की पहुंच रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए।
गुलजार सिंह की आत्महत्या का जिक्र करते हुए बाजवा ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को कथित तौर पर धमकाने और परेशान करने की शिकायतें सामने आई हैं। बाजवा ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच करवाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि पंजाब को अब नए प्रचार अभियानों से ज्यादा जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों की जरूरत है। सरकार को युवाओं की सुरक्षा और नशे के नेटवर्क को खत्म करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
