दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले हरीश राणा आखिर दुनिया को अलविदा कह गए। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एंपायर सोसाइटी निवासी हरीश ने मंगलवार शाम को अंतिम सांस ली और बुधवार को दक्षिण दिल्ली स्थित ग्रीन पार्क में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इस मौके पर माहौल बेहद भावुक रहा। परिवार और स्थानीय लोगों के अलावा उनके रिलेटिव ने नम आंखों से हरीश को श्रद्धांजलि दी।
19 की उम्र से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे हरीश
पंजाब विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग कर रहे हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से नीचे गिरने के बाद कोमा में चले गए थे। तब 19 वर्ष की उम्र से लगातार वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। जुलाई-2010 में इंजीनियरिंग में हरीश ने दाखिला लिया था और अगस्त 2013 में रक्षाबंधन के दिन बहन से मोबाइल पर बात करते हुए वह पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। 2013 उनकी पढ़ाई का अंतिम वर्ष था। गिरने के बाद से वह कोमा में थे। उनकी जिंदगी मशीनों तक सिमट गई थी। कभी सांस लेते तो आंखें झपकते, पर न बोल और न हिल पाते थे।
कोई सुधार न देखकर परिवार ने कोर्ट से मांगी थी इच्छामृत्यु
परिवार ने हरीश को बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन आखिर सफलता नहीं मिली। उन्हें होश कभी वापस नहीं आया। कोई सुधार न देखकर परिवार ने अंतत: सुप्रीम कोर्ट से हरीश के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्य की इजाजत मांगी। कोर्ट ने पूरी संवेदनशीलता से मामले को सुना और फिर मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत प्रक्रिया पूरी करने के एम्स को निर्देश दिए। अस्पताल ने इसके बाद डॉ. सीमा मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई और कोर्ट के आदेशानुसार डॉक्टरों ने हरीश से लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया पूरी की।
