चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने राज्य में स्थायी डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मंजूरी के बाद 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही संघ लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा।
UPSC इस पैनल में से तीन अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट करेगा, जिनमें से एक को नियमित डीजीपी के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
पैनल में शामिल अधिकारियों की सूची
पैनल में 1992, 1993 और 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल हैं, जो डीजीपी पद के लिए पात्र हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
1992 बैच: कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव
पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी शरद सत्य चौहान
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के स्पेशल डीजीपी कुलदीप सिंह
हरप्रीत सिंह सिद्धू (पोस्टिंग का इंतजार)
1993 बैच:
कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन व महिला मामलों की स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी डॉ. जितेंद्र कुमार जैन
रेलवे के स्पेशल डीजीपी शशि प्रभा द्विवेदी
1994 बैच:
स्पेशल डीजीपी (मुख्यालय) सुधांशु शेखर श्रीवास्तव
विजिलेंस ब्यूरो के स्पेशल डीजीपी-कम-चीफ डायरेक्टर प्रवीण कुमार सिन्हा
ट्रैफिक व रोड सेफ्टी के स्पेशल डीजीपी अमनदीप सिंह राय
साइबर क्राइम के स्पेशल डीजीपी वरुण नेराजा
महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर की डायरेक्टर अनीता पुंज
मानवाधिकार के स्पेशल डीजीपी नरेश कुमार
टेक्निकल सर्विसेज के स्पेशल डीजीपी राम सिंह
डीजीपी का कार्यकाल और प्रक्रिया
पैनल से चुने जाने वाले डीजीपी को कम से कम दो साल का कार्यकाल मिलेगा, भले ही उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख कुछ भी हो। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों और बाद में तय UPSC गाइडलाइंस के तहत लागू किया गया है। पंजाब में जुलाई 2022 से कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था जारी थी। आम आदमी पार्टी सरकार ने गौरव यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी थी, और वे तब से लगातार इस पद पर कार्यरत हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 फरवरी को राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि नियमित डीजीपी की नियुक्ति UPSC की प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी। पंजाब सरकार ने 2023 में पारित पंजाब पुलिस संशोधन विधेयक का हवाला देकर अलग प्रक्रिया अपनाने की कोशिश की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च को इसे खारिज कर दिया।
UPSC की एंपैनलमेंट कमेटी में चेयरमैन या सदस्य, केंद्रीय गृह सचिव का प्रतिनिधि और केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख शामिल होते हैं। यही कमेटी राज्य द्वारा भेजे गए नामों में से तीन अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट करेगी। इसके बाद पंजाब सरकार अंतिम फैसला लेकर राज्य को नया नियमित डीजीपी नियुक्त करेगी। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही पंजाब पुलिस को स्थायी नेतृत्व मिलेगा, जिससे राज्य में कानून और व्यवस्था के मामलों में स्थिरता आएगी।
