पंजाब में IAS अफसरों के सस्पेंशन पर बवाल : AAP ने बताया सही, BJP ने केंद्र सरकार से की बड़ी मांग

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पंजाब सरकार की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई में दो सीनियर IAS अफसरों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड करने के मामले में विवाद खड़ा हो गया है. IAS अधिकारी कमल किशोर यादव और जसप्रीत सिंह के निलंबन के आदेशों में कारणों के बारे में नहीं बताया गया है।

दरअसल, ये पूरा मामला केंद्र सरकार की मिशन सक्षम आंगनवाड़ी स्कीम के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए स्मार्टफोन खरीदने में छह साल की देरी से संबंधित बताया जा रहा है।

पंजाब में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है तब से ही लगातार ब्यूरोक्रेसी और सरकार के बीच टकराव की स्थिति देखी गई है. सरकार के 4 साल के कार्यकाल के अंदर कुल मिलाकर 20 सीनियर IAS और IPS पुलिस अफसरों को किसी ना किसी कारण के चलते सस्पेंड किया गया है. हालांकि पूरे मामले को लेकर IAS और IPS अफसर एसोसिएशन फिलहाल कुछ भी कहने से बच रही है. वहीं, इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब सरकार पर हमला बोला है।

किस मामले में IAS अधिकारियों पर हुआ एक्शन?

जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार के मिशन सक्षम आंगनवाड़ी के तहत, 2018 में पंजाब को लगभग 27 करोड़ रुपये (60 प्रतिशत केंद्रीय हिस्सा) जारी किए गए थे. जिसमें राज्य के सामाजिक सुरक्षा विभाग को बाकी 40 प्रतिशत का योगदान देना था. सरकार ने शुरू में 4G स्मार्टफोन के लिए बोलियां मंगाई थीं, लेकिन बाद में टेंडर को बदलकर 5G डिवाइस खरीदने का फैसला किया गया. सस्पेंड किए गए IAS अधिकारी पंजाब इन्फोटेक के लिए स्मार्टफोन खरीदने के लिए जिम्मेदार थे।

जिसके बाद पंजाब सरकार द्वारा चुने गए वेंडर ने कोर्ट का रुख किया था. कोर्ट द्वारा मामले में कथित तौर पर एक प्रतिकूल आदेश पारित किया गया था. इस वजह से स्मार्टफोन खरीदने में छह साल की देरी हुई, जिससे न सिर्फ इस बीच बेहतर टेक्नोलॉजी उपलब्ध हुई, बल्कि लागत भी 34 करोड़ रुपये से बढ़कर 60 करोड़ रुपये हो गई।

28,515 स्मार्टफोन खरीदने में छह साल की देरी

इसी मामले में, जिसमें पोषण अभियान के तहत 12 लाख लाभार्थियों को ट्रैक करने के लिए 28,515 स्मार्टफोन खरीदने में छह साल की देरी हुई. सोशल सिक्योरिटी विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी विकास प्रताप और जॉइंट सेक्रेटरी आनंद सागर शर्मा का भी ट्रांसफर कर दिया गया है. प्रताप को कोई पोस्टिंग नहीं दी गई है, जबकि शर्मा को गुरदासपुर में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात किया गया है।

हालांकि ये प्रक्रिया नौकरशाही की उलझनों में फंसी रही और स्मार्टफोन अभी तक खरीदे नहीं गए हैं. इस बीच आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी डिवाइस मिलने तक लाभार्थियों को ट्रैक करने के लिए अपने स्मार्टफोन इस्तेमाल करने के लिए सालाना भत्ता मिल रहा है. इस मामले के अलावा कुछ अन्य मामले भी हैं जिसमें इस सरकार के कार्यकाल में सीनियर IPS और IAS अफसरों को सरकार ने लापरवाही की बात कहते हुए सस्पेंड किया है।

4 साल में 20 सीनियर IAS और IPS सस्पेंड

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को बने 4 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है. अपने 4 साल के कार्यकाल में आम आदमी पार्टी सरकार ने 20 सीनियर IAS और IPS अफसरों को किसी ना किसी कारण के चलते सस्पेंड किया है. इसके अलावा 20 सीनियर अफसरों को कई महीनो तक बिना किसी पोस्टिंग के भी रखा गया. माना जाता है कि जब से पंजाब में 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार आई है तब से ब्यूरोक्रेसी के साथ उनके संबंध बेहतर नहीं रहे हैं।

हालांकि इस सब के पीछे आम आदमी पार्टी करप्शन और जनता से जुड़े कामों को लेकर लापरवाही करने वाले अफसरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति होने की बात करती है. इससे पहले पिछले साल पंजाब सरकार के विजिलेंस विभाग की कार्यवाही को गैरजरूरी बताते हुए रेवेन्यू डिपार्टमेंट से जुड़े PCS अफसर मॉस लीव पर भी चले गए थे।

मंत्री बोले- जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एक्शन

पंजाब सरकार हाल ही में सस्पेंड किए गए आईएएस अफसर पर हुई कार्यवाही को सही ठहरा रही है. पंजाब सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और वित्त मंत्री हरपाल चीमा का कहना है कि जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही और करप्शन को लेकर इस सरकार में जीरो टॉलरेंस की नीति है. ऐसे अफसर जिनकी लापरवाही की वजह से जनहित से जुड़े मुद्दे प्रभावित होते हैं. या जनता को परेशान होना पड़ता है उनके खिलाफ इसी तरह की कार्यवाही जारी रहेगी।

सुनील जाखड़ ने पंजाब सरकार पर हमला बोला

इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब सरकार पर हमला बोला है. जाखड़ ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अपनी मनमानी और धक्केशाही रवैये के तहत ईमानदार अधिकारियों को निशाना बनाया है. हाल ही में जिन दो आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड किया गया, उनके खिलाफ ये कार्रवाई किसी प्रशासनिक गलती के कारण नहीं, बल्कि इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर सरकार के लेन-देन और मनमाफिक फैसलों में हामी नहीं भरी. उन्होंने इसे प्रशासनिक ईमानदारी पर सीधा हमला करार दिया।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केंद्र सरकार से करेंगे मांग

पंजाब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जाखड़ ने बताया कि ये पूरा मामला केंद्र सरकार की मिशन सक्षम आंगनवाड़ी योजना से जुड़ा हुआ है. जाखड़ ने कहा कि पंजाब सरकार चाहती थी कि इस योजना के तहत स्मार्टफोन खरीद में अपने कार्यकर्ताओं और वर्करों को फायदा पहुंचाया जाए, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने इसमें सहयोग करने से इनकार कर दिया. इसी का नतीजा है कि उनके खिलाफ ये कठोर कदम उठाया गया. सुनील जाखड़ ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि वो इस पूरे मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय और एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के समक्ष उठाएंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मांग की जाएगी कि इस धक्केशाही भरे कदम की गहन जांच हो और सख्त कार्रवाई की जाए।

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