17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों की मुख्य मांग डीए नहीं, केंद्रीय वेतनमान रद्द कर पंजाब वेतनमान लागू करना है
होशियारपुर, 5 सितंबर 2026: पंजाब मुलाजिम एवं पेंशनर्स सांझा फ्रंट और सांझा मुलाजिम मंच पंजाब के आधार पर बनी संयुक्त तालमेल कमेटी ने पंजाब सरकार पर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बेबुनियाद, झूठे और भ्रामक आंकड़े पेश करने का आरोप लगाया है।
संयुक्त तालमेल कमेटी के प्रमुख नेताओं सतीश राणा, गुरनाम सिंह विरक, सुखचैन सिंह खैहरा, रणजीत सिंह राणवा, सुशील कुमार फौजी, करम सिंह धनोआ, हरजिंदर सिंह पन्नू, जर्मनजीत सिंह, मनप्रीत सिंह, राकेश कुमार, भजन सिंह गिल, एन.के. कलसी, मनजीत सिंह बासरके, तरसेम सिंह भट्ठल, कुलविंदर सिंह ढिल्लों, सुखदेव सिंह सैणी, गुरशरण सिंह हुंदल, गगनदीप सिंह भुल्लर, दीदार सिंह चोकर, अमरीक सिंह कंग, दिलप्रीत सिंह, दिग्विजय पाल शर्मा, हरनेक सिंह, अवतार सिंह कैंथ, रघवीर सिंह बड़वाल, जगदीश सिंह चाहल, मनदीप सिंह, राधे श्याम, जसवीर सिंह तलवाड़ा, करमजीत सिंह बीहला और बोबिंदर सिंह ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर यह बात कही।
‘कर्मचारियों की मुख्य मांग डीए नहीं, पंजाब वेतनमान है’
कमेटी नेताओं ने कहा कि गत दिवस आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कैबिनेट सब-कमेटी के फैसले के संबंध में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा था कि 17 जुलाई 2020 से भर्ती कर्मचारियों को 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की सिफारिश मुख्यमंत्री को की जाएगी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त तालमेल कमेटी ने कहा कि 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों की मुख्य मांग महंगाई भत्ता नहीं है, बल्कि 17 जुलाई 2020 के पत्र के माध्यम से कथित तौर पर जबरन लागू किए गए केंद्रीय वेतनमान को रद्द कर पंजाब के वेतनमान लागू करना है।
नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि क्या वेतनमान और महंगाई भत्ता दो अलग-अलग सेवा शर्तें नहीं हैं?
वेतनमान और डीए में अंतर बताया
कमेटी नेताओं ने कहा कि पंजाब के गठन के बाद वेतनमान संबंधी फैसले समय-समय पर पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर किए जाते रहे हैं, जबकि महंगाई भत्ता महंगाई की भरपाई के लिए निर्धारित दरों के अनुसार दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में वेतनमान, सेवा शर्तें, योग्यताएं और भत्ते अलग-अलग हो सकते हैं, जबकि महंगाई भत्ता महंगाई सूचकांक से जोड़कर निर्धारित किया जाता है।
नेताओं ने कहा कि पंजाब के कर्मचारी और पेंशनर पंजाब के आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस तथा न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों के बराबर महंगाई भत्ता देने की मांग कर रहे हैं।
85 हजार कर्मचारियों का आंकड़ा बताया बेबुनियाद
संयुक्त तालमेल कमेटी ने सरकार द्वारा 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए 85 हजार कर्मचारियों को डीए देने संबंधी बताए गए आंकड़े पर भी सवाल उठाए हैं।
नेताओं ने कहा कि इस वर्ग के कई कर्मचारी अभी भी तीन वर्ष की प्रोबेशन अवधि में हैं। उनके अनुसार, इस दौरान कर्मचारियों को केवल मूल वेतन दिया जाता है और अन्य भत्तों तथा सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक क्लर्क को प्रोबेशन अवधि के दौरान केवल 19,900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं और उसे वार्षिक वेतन वृद्धि सहित अन्य लाभ भी नहीं मिलते।
कमेटी ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार की 16 मई 2023 की नीति के तहत नियमित किए गए कुछ कर्मचारियों को भी निर्धारित वेतन मिल रहा है और उन्हें अन्य भत्ते व सुविधाएं नहीं मिलतीं।
51 प्रतिशत खर्च के सरकारी दावे पर भी उठाए सवाल
संयुक्त तालमेल कमेटी ने कैबिनेट सब-कमेटी के सदस्यों द्वारा पहले किए गए उस दावे पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें कहा गया था कि पंजाब की वार्षिक आय का 51 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन एवं पेंशन पर खर्च होता है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस खर्च में विभिन्न विभागों, बोर्डों, निगमों, संस्थानों, अधिकारियों और अन्य पदाधिकारियों पर होने वाला कितना खर्च शामिल है।
कमेटी ने सरकार पर विज्ञापनों और अन्य सुविधाओं पर सरकारी खजाने का भारी खर्च करने का आरोप भी लगाया।
सुखचैन सिंह खैहरा की बदली रद्द करने की मांग
संयुक्त तालमेल कमेटी ने सरकार से बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने की मांग करते हुए कहा कि कमेटी के प्रमुख नेता सुखचैन सिंह खैहरा की बदली रद्द की जाए तथा सामूहिक अवकाश पर गए कर्मचारियों के संबंध में जारी पत्र वापस लिया जाए।
नेताओं ने सरकार से टकराव की नीति छोड़कर कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित मांगों का जल्द समाधान करने की मांग की।
कमेटी की प्रमुख मांगें
संयुक्त तालमेल कमेटी ने मांग की कि—
- महंगाई भत्ते और वेतन आयोग के बकाए संबंधी हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को भुगतान किया जाए।
- सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को बिना शर्त पूर्ण वेतनमान पर पक्का किया जाए।
- मिड-डे मील, आशा वर्करों तथा आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों के मानदेय एवं इंसेंटिव दोगुने किए जाएं।
- पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए।
- पेंशनरों की पेंशन 2.59 के गुणांक से दोहराई जाए।
- प्रोबेशन अवधि से संबंधित 15 जनवरी 2015 का पत्र वापस लिया जाए।
- केंद्रीय वेतनमान से संबंधित 17 जुलाई 2020 का पत्र रद्द किया जाए।
- सभी विभागों और संस्थानों में खाली पद नियमित भर्ती के माध्यम से भरे जाएं।
- एसीपी योजना को दोबारा लागू किया जाए।
- बंद किए गए भत्तों को संशोधित कर बहाल किया जाए।
- विकास के नाम पर लिया जा रहा 200 रुपये प्रतिमाह टैक्स बंद किया जाए।
- कर्मचारियों और पेंशनरों के पक्ष में अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों को सभी पर लागू किया जाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संयुक्त तालमेल कमेटी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों का जल्द समाधान नहीं किया तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
कमेटी के अनुसार, 8 सितंबर को पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन से संबंधित सभी क्लेरिकल कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर जाएंगे। इस दौरान जिला केंद्रों पर आयोजित रैलियों में संयुक्त तालमेल कमेटी से संबंधित विभिन्न संगठन भी शामिल होंगे।
इसके बाद 12 और 13 सितंबर को सात मंत्रियों के घरों का घेराव किया जाएगा। वहीं, 19 और 20 सितंबर को शेष मंत्रियों और विधायकों के घरों का घेराव करने का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
संयुक्त तालमेल कमेटी ने 10 अक्टूबर को संगरूर में महा रैली करने का भी ऐलान किया है। इसके बाद 21 और 22 अक्टूबर को पंजाब के कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर जाने की घोषणा की गई है।
