पाकिस्तान में 200 साल पुराने गुरुद्वारे को गिराए जाने का खन्ना ने लिया कड़ा संज्ञान

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गुरद्वारे का पुनयनिर्माण और अल्पसंख्यकों की जान-माल और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय को लिखा पत्र
होशियारपुर, 1 सितंबर  : पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों और संपत्तियों की कथित दुर्दशा संबंधी समाचार का कड़ा संज्ञान लिया है। खन्ना ने इस संबंध में केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार के समक्ष मामला मजबूती से उठाने तथा अल्पसंख्यकों के धार्मिक एवं संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
खन्ना के कार्यालय से सचिव ज्योति कुमार जौली ने बताया कि समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार पाकिस्तान के बलूचिस्तान में लगभग 200 साल पुराने गुरुद्वारा साहिब को कथित तौर पर गिराकर वहां शॉपिंग मॉल बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। खबर में यह भी उल्लेख है कि पाकिस्तान में कभी लगभग 12 गुरुद्वारे होने के बावजूद अब उनकी संख्या घटकर केवल दो रह जाने की बात सामने आई है। समाचार के अनुसार संबंधित धार्मिक संपत्ति को लेकर निजी बिल्डर को जमीन दिए जाने तथा इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। खबर में यह भी बताया गया है कि इस मामले को लेकर भारत में सिख समुदाय भारी रोष व्याप्त है। खन्ना ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों, उनकी संपत्तियों और धार्मिक विरासत का संरक्षण गंभीर चिंता का विषय है। किसी भी देश में धार्मिक आस्था से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नष्ट किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के ऐतिहासिक गुरुद्वारे केवल इमारतें नहीं, बल्कि पूरी मानवता और सिख इतिहास की अमूल्य विरासत हैं। खन्ना ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय से मांग की कि पाकिस्तान में सिखों सहित सभी अल्पसंख्यकों की जान, माल, धार्मिक स्थलों और संपत्तियों की सुरक्षा का मुद्दा पाकिस्तान सरकार के समक्ष सख्ती से उठाया जाए। उन्होंने संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और गुरद्वारे के पुनयनिर्माण की मांग की है. खन्ना ने कहा कि यदि ऐतिहासिक गुरुद्वारे को नुकसान पहुंचाने या उसकी संपत्ति के हस्तांतरण में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसे तत्काल रोकने के लिए प्रभावी राजनयिक कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए हर संभव मंच पर मजबूती से आवाज उठानी चाहिए, ताकि धार्मिक स्थलों को नष्ट करने अथवा उनकी संपत्तियों पर अवैध कब्जे की प्रवृत्ति पर रोक लग सके।

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