3700 मीटर ऊंचे चंद्रखणी दर्रे से मणिकर्ण तक तलाश, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत पार्वती घाटी जहां देश-विदेश से पर्यटक रोमांचक ट्रैकिंग के लिए पहुंचते हैं, वहीं इसके दुर्गम ट्रैक कई बार रहस्य बन जाते हैं। अलग-अलग घटनाओं में ट्रैकिंग या घूमने निकले दो लोग करीब एक माह से लापता हैं, लेकिन लगातार चलाए गए तलाशी अभियानों के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लंबे समय तक तलाश के बाद भी दोनों का पता नहीं चलने से पार्वती घाटी में ट्रैकिंग करने वाले पर्यटकों की सुरक्षा, निगरानी और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एक तरफ खड़ी ढलान, दूसरी तरफ गहरी खाई
पार्वती घाटी के कई ट्रैक बेहद कठिन और जोखिमपूर्ण हैं। ऊंचाई वाले रास्तों पर कहीं खड़ी चढ़ाई तो कहीं अचानक गहरी ढलान और खाइयां सामने आती हैं। घने जंगलों के कारण रास्ता भटकने का खतरा भी बना रहता है।
इसके अलावा नदी-नालों का तेज बहाव और बरसात के दौरान फिसलन जोखिम को और बढ़ा देती है। जंगलों में जंगली जानवरों की मौजूदगी भी ट्रैकिंग करने वालों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा कर सकती है।
मलाणा की ओर निकला मेडिकल छात्र, फिर नहीं लौटा
झारखंड निवासी 24 वर्षीय मेडिकल छात्र सुकांत गुइन 8 अगस्त को अकेले मलाणा की ओर ट्रैकिंग के लिए निकले थे। इसके बाद उनका संपर्क नहीं हो पाया।
उनकी तलाश में बचाव दलों ने करीब 3700 मीटर ऊंचे चंद्रखणी दर्रे समेत आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में अभियान चलाया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद कई इलाकों को खंगाला गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
स्थानीय बचाव विशेषज्ञों ने युवक के किसी खड़ी ढलान से गिरने जैसी आशंका जताई है, लेकिन उसकी पुष्टि नहीं हुई है। जंगली जानवर से जुड़े किसी संभावित हादसे की आशंका भी व्यक्त की गई है। अंतिम स्थिति जांच और तलाश पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मणिकर्ण में मिली आखिरी लोकेशन, फिर बंद हो गया मोबाइल
दूसरे मामले में दिल्ली निवासी 32 वर्षीय नरेंद्र रावत 22 अगस्त को घर से निकलने के बाद लापता हो गए। 24 अगस्त को उनके मोबाइल की अंतिम लोकेशन मणिकर्ण में मिली थी। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया।
परिवार की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। परिजनों का आरोप है कि शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज करने और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच के मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इन आरोपों पर संबंधित पुलिस कार्रवाई का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पिता की सरकार से गुहार—सोलो ट्रैकिंग पर हो सख्ती
सुकांत गुइन के पिता ने राज्य सरकार से दुर्गम ट्रैकिंग रूटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने अकेले ट्रैकिंग करने वाले पर्यटकों के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन/ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। साथ ही बेहद जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में सोलो ट्रैकिंग पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार करने की अपील की है।
सुरक्षित ट्रैकिंग के लिए अकेले न निकलें
विशेषज्ञों के अनुसार, पार्वती घाटी के दुर्गम ट्रैक पर पर्यटकों को अकेले जाने से बचना चाहिए। अनुभवी स्थानीय गाइड को साथ रखना, मौसम की जानकारी लेना, तय ट्रैक से बाहर न जाना और परिवार अथवा स्थानीय प्रशासन को यात्रा की जानकारी देना सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
खूबसूरती के साथ चुनौती भी
पार्वती घाटी के कठिन ट्रैक लंबे समय से एडवेंचर पसंद करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं। लेकिन यहां की भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य पर्यटन मार्गों से अलग हैं। लगातार सामने आ रहे लापता होने के मामलों ने ट्रैकिंग रूटों पर निगरानी, पंजीकरण, संचार व्यवस्था और आपातकालीन बचाव तंत्र को मजबूत करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
दोनों लापता लोगों की तलाश जारी है और उनके संबंध में अंतिम जानकारी जांच एवं बचाव अभियानों के बाद ही सामने आएगी।
