होशियारपुर, चंडीगढ़ और मोहाली में एक साथ तलाशी; पीएसआईईसी की औद्योगिक जमीन के आवंटन और 12 प्लॉटों को 125 में बांटने के मामले की पड़ताल
चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को पूर्व उद्योग मंत्री और कांग्रेस नेता सुंदर शाम अरोड़ा के खिलाफ जांच तेज करते हुए पंजाब और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर छापेमारी की। ईडी की टीमों ने अरोड़ा के होशियारपुर स्थित आवास के अलावा उनके बेटे प्रतीक अरोड़ा और उनसे जुड़े कारोबारी समूहों के ठिकानों पर भी तलाशी ली। अधिकारियों के मुताबिक, कुल 14 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। कार्रवाई में मार्बेला ग्रुप, गुलमोहर टाउनशिप ग्रुप, जीआरजी डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स एलएलपी, एसआरजी डेवलपर्स और कारोबारी संजीव जुनेजा से जुड़े ठिकाने भी शामिल बताए गए हैं।
ईडी की यह कार्रवाई कथित भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के तहत की गई है। जांच का एक प्रमुख पहलू पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) के औद्योगिक भूखंडों के आवंटन और बाद में उनके मालिकाना हक में हुए बदलावों से संबंधित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि औद्योगिक इस्तेमाल के लिए आवंटित जमीन के हस्तांतरण और उसे रियल एस्टेट परियोजना में बदलने की प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
सुबह पांच बजे होशियारपुर स्थित आवास पहुंची टीम
ईडी की टीम सोमवार सुबह करीब पांच बजे होशियारपुर में जोधा माल रोड स्थित अरोड़ा के आवास पर पहुंची। अधिकारियों के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी तैनात थे। टीम ने परिसर को घेरकर तलाशी शुरू की। इसी दौरान पंजाब के अन्य शहरों और चंडीगढ़ में भी संबंधित कारोबारियों तथा कंपनियों से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई की गई।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अरोड़ा के वकील एचएस सैनी ने ईडी अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने कुछ दस्तावेज मांगे थे और संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध करवाए गए। हालांकि, तलाशी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली, इस बारे में एजेंसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।
25 एकड़ औद्योगिक जमीन से जुड़ा है मामला
जांच की पृष्ठभूमि में मोहाली की एक औद्योगिक जमीन का मामला भी है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 1987 में उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आनंद लैंप्स लिमिटेड को करीब 25 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। बाद में यह जमीन सिग्निफाई इनोवेशंस के पास पहुंची और फिर गुलमोहर टाउनशिप को बेची गई।
आरोप है कि मार्च 2021 में तत्कालीन उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने गुलमोहर टाउनशिप की ओर से प्लॉटों के आगे विभाजन से संबंधित प्रस्ताव को विभागीय स्तर पर आगे बढ़ाया था। इसके बाद गठित समिति ने 12 भूखंडों को 125 छोटे प्लॉटों में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी जांच में आरोप लगाया था कि प्रस्ताव को मंजूरी देते समय जरूरी परियोजना रिपोर्ट, प्रस्ताव रिपोर्ट और कंपनी से संबंधित दस्तावेजों की उचित जांच नहीं की गई। आरोप यह भी था कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक परामर्श लिए बिना प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया। विजिलेंस के अनुसार, इस प्रक्रिया से सरकारी खजाने को करीब 1.23 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। ये आरोप जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए थे; इन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
2023 में विजिलेंस ने दर्ज किया था मामला
इस जमीन और प्लॉटों के विभाजन से जुड़े मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने जनवरी 2023 में पूर्व मंत्री, एक आईएएस अधिकारी, सरकारी अधिकारियों और गुलमोहर टाउनशिप से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। विजिलेंस ने आरोप लगाया था कि औद्योगिक जमीन के इस्तेमाल और प्लॉटों के विभाजन की प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कर निजी रियल एस्टेट कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। इस मामले में पीएसआईईसी के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हुई थी।
अब ईडी इसी तरह के कथित भ्रष्टाचार और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की मनी लॉन्ड्रिंग के नजरिये से जांच कर रही है। एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि संबंधित जमीनों और कंपनियों के बीच हुए लेन-देन में धन का प्रवाह किस प्रकार हुआ और इसमें किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका रही।
पहले भी आयकर विभाग ने की थी लंबी तलाशी
सुंदर शाम अरोड़ा के होशियारपुर स्थित आवास पर इससे पहले आयकर विभाग भी तलाशी अभियान चला चुका है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस साल जनवरी में आयकर विभाग की कार्रवाई करीब 62 घंटे तक चली थी। उस समय अरोड़ा ने कहा था कि कार्रवाई उनके बेटे के प्रॉपर्टी कारोबार से संबंधित है और परिवार ने जांच में सहयोग किया है।
अरोड़ा पहले भी पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की जांच का सामना कर चुके हैं। अक्टूबर 2022 में उन पर एक वरिष्ठ विजिलेंस अधिकारी को कथित तौर पर 50 लाख रुपये की रिश्वत देने की पेशकश करने का आरोप लगा था। इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और बाद में उन्हें जमानत मिली थी। अरोड़ा पहले इन आरोपों को नकारते रहे हैं।
ईडी की मौजूदा कार्रवाई के बाद अब जांच का केंद्र औद्योगिक जमीन के आवंटन, प्लॉटों के विभाजन, कंपनियों के बीच हुए लेन-देन और कथित आय से अधिक संपत्ति से जुड़े दस्तावेज हैं। तलाशी में मिले रिकॉर्ड की जांच के बाद एजेंसी आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी। फिलहाल किसी भी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं हुई है और मामले में अंतिम स्थिति जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।