मुख्यमंत्री ने कहा- अग्निवीर योजना से हिमाचल को सबसे ज्यादा नुकसान, नियमित भर्ती के पक्ष में राज्य सरकार
एएम नाथ।/ रोहित जसवाल। शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में सोमवार को भूतपूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व सैनिकों ने अग्निवीर योजना को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखते हुए इसे बंद करने की मांग उठाई। पूर्व सैनिकों ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का आग्रह किया।
कुल्लू के पूर्व सैनिक शिवदयाल सिंह ने कहा कि अग्निवीर योजना के तहत युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि चार साल की सेवा के बाद अधिकांश युवाओं को सेना से बाहर कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन सहित कई अन्य सुविधाएं नहीं मिलतीं। उन्होंने सरकार से सेना में पहले की तरह नियमित भर्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वह अग्निवीर योजना को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे और हिमाचल प्रदेश के पूर्व सैनिकों की भावनाओं को केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे।
उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना का सबसे अधिक प्रभाव हिमाचल प्रदेश पर पड़ा है। विशेष रूप से कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना और हमीरपुर जैसे जिलों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा है, क्योंकि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सेना में नियमित भर्ती के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि सेना में भर्ती कोटा कम किए जाने से भी हिमाचल के युवाओं को निराशा का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि चार परमवीर चक्र विजेताओं की भूमि हिमाचल प्रदेश के युवाओं और देश के वीर जवानों के साथ अग्निवीर योजना को लेकर अन्याय नहीं होना चाहिए।
पुलिस में 1300 पदों पर भर्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में पुलिस विभाग में 1,300 कांस्टेबल पदों पर भर्ती की गई है, जबकि आने वाले समय में 1,000 और पदों पर भर्ती की जाएगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार ग्रामीण अर्थव्यवस्था है, क्योंकि राज्य की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी गांवों में रहती है। राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था की गई है और दूध के दाम में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री ने पूर्व सैनिकों से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ने और प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।
‘पूर्व सैनिक प्रदेश की धरोहर’
सैनिक कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सैनिक बहुल राज्य है और पूर्व सैनिक प्रदेश की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पूर्व सैनिकों के कल्याण को लेकर गंभीर हैं और इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ सरल और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक में पूर्व सैनिकों और बोर्ड सदस्यों की ओर से उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए।
बैठक में हिमाचल प्रदेश भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम के चेयरमैन कर्नल मनीष कुमार, मुख्य सचिव के.के. पंत, सचिव आशीष सिंहमार, प्रशासनिक सचिव, विभागाध्यक्ष और बोर्ड के सदस्य उपस्थित रहे।
