प्रदेश सरकार ने रोड ड्रेनेज पॉलिसी को दी स्वीकृति : दीर्घकालिक रणनीति के तहत सड़कों को किया जाएगा अधिक सुदृढ़

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एएम नाथ। शिमला : पहाड़ी भौगोलिक स्थितियों के दृष्टिगत हिमाचल प्रदेश में सड़कंे जीवन रेखा का काम करती है। प्रदेश में सड़कों का विस्तृत नेटवर्क है। दूर-दराज के गांवों से लेकर जिला मुख्यालयों तक राज्य में सड़कें आवागमन, व्यापार, पर्यटन और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। सड़कों के जाल को विस्तार देने और इन्हें सुरक्षित बनाने से राज्य की आर्थिक प्रगति के साथ-साथ लोगों का उत्थान भी सुनिश्चित होगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने एक वृहद ‘रोड ड्रेनेज पॉलिसी’ तैयार की है। इस नीति का लक्ष्य सशक्त सड़क बुनियादी अधोसंरचना के एक नए युग की शुरुआत करना है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यह नीति मानसून में होने वाली भारी बारिश के कारण होने वाले सड़कों के नुकसान को कम करने में प्रभावी साबित होगी।
हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण विभाग 40,000 किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क का रख-रखाव सुनिश्चित कर रहा है। इनमें जिला की मुख्य सड़कें, संपर्क मार्ग और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें शामिल हैं। क्षेत्रीय निरीक्षण और मानसून के बाद के आकलन से यह यह बात सामने आयी है कि अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के कारण सड़कों को भारी क्षति पहुंचती है।
राज्य में वर्ष 2023 और 2025 में सड़कों को क्रमशः 2400 करोड़ रुपये और 3000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ था। तकनीकी मूल्यांकन से यह भी स्पष्ट हुआ कि अपर्याप्त ड्रेनेज सिस्टम और भूस्खलन के कारण ही सड़कों को अधिकांश नुकसान हुआ है। मानसून से सड़कों को होने वाली क्षति की मरम्मत पर हर वर्ष भारी खर्च होता है।
अब तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़कों पर जल निकासी व्यवस्था पारंपरिक एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर विकसित की जाती रही है। पुरानी जल निकासी व्यवस्था में सुधार करते हुए नई ड्रेनेज नीति में वैज्ञानिक हाइड्रोलॉजिकल या भू-आधारित डिजाइन सिद्धांतों को अपनाया गया है। इस नीति में हाइड्रोलॉजी आधारित डिजाइन को केंद्र में रखा गया है। अब ड्रेनेज संरचनाएं वास्तविक वर्षा तीव्रता और जलग्रहण क्षेत्र की विशेषताओं जैसे वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर डिजाइन की जाएंगी। यह डेटा एवं विश्लेषण आधारित नीति मानसून से होने वाली वार्षिक क्षति को कम करने, सड़क नेटवर्क के लचीलेपन को बढ़ाने और सार्वजनिक सुरक्षा व उपयोगिता को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।
उन्होंने बताया कि सभी नई सड़क परियोजनाओं में बॉक्स कल्वर्ट को डिफॉल्ट ड्रेनेज संरचना के रूप में अपनाया जाएगा क्योंकि इसमें जल भराव के कारण जाम होने की संभावना कम होती है और इन्हें मशीनों से साफ करना आसान होता है। नीति में पहाड़ी ढलानों की मजबूती पर भी विशेष बल दिया गया है और भूस्खलन संभावित तथा रिसाव क्षेत्रों में निवारण उपाय अनिवार्य किए गए हैं। सड़क अधोसंरचना में ड्रेनेज प्रणाली को मुख्य इंजीनियरिंग घटक के रूप में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस नीति में आबादी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन क्षेत्रों में नालियों को मानकीकृत डिजाइन के अनुसार ढककर रखने का प्रावधान किया जाएगा। खुले हिस्सों में ऊंचे कर्ब और इनलेट ओपनिंग बनाई जाएंगी ताकि जल प्रवाह सुचारू रहे और यातायात सुरक्षित रहे। रात के समय दृश्यता और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए उचित अंतराल पर रिफ्लेक्टर भी लगाए जाएंगे। इन उपायों का उद्देश्य केवल जल निकासी में सुधार करना ही नहीं बल्कि सड़कों को अधिक सुरक्षित और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाना भी है।
उन्होंने बताया कि नीति का कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा जिसमें आर्थिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हर मौसम में संपर्क सुविधा सुनिश्चित करने के लिए जिलों की मुख्य सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगीं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त प्रवर्तन का प्रावधान किया गया है ताकि घरेलू अपशिष्ट जल, छत का पानी, सीवेज और ठोस कचरे को सड़क नालियों में अनाधिकृत रूप से बहने से रोका जा सके। नालियों में वाहन खड़ा करना, निर्माण सामग्री रखना या जल प्रवाह में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
यह नीति हिमाचल प्रदेश में मानसून से होने वाली सड़कों की क्षति को कम करने के लिए एक दीर्घकालिक संरचनात्मक समाधान है। वैज्ञानिक योजनाएं, मजबूत इंजीनियरिंग मानकों, ढलान सुरक्षा उपायों और सख्त प्रवर्तन तंत्र के माध्यम से राज्य एक सुरक्षित, अधिक लचीले और टिकाऊ सड़क नेटवर्क विकसित करने की दिशा में अग्रसर है।
व्यवस्था परिवर्तन के व्यापक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा और नागरिकों के लिए निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ अवसंरचना सुधार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सड़क ड्रेनेज जैसे मूलभूत तंत्र को मजबूत करना केवल तकनीकी उन्नयन नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और बेहतर जीवन गुणवत्ता के प्रति शासन की प्रतिबद्धता है। इस दूरदर्शी पहल के माध्यम से राज्य संस्थागत सुधार और टिकाऊ अवसंरचना विकास की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है।
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