फर्म ले उड़ी 3.5 करोड़ रुपये, दफ्तर पर ताला : 52 लोगों की कड़ी मिहनत की कमाई

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एएम नाथ। शिमला :  हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक सोसायटी पर धोखाधड़ी का के आरोप लगे हैं. छोटा शिमला थाने में महिला रीता वालिया सहित 52 से अधिक लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने इस सोसायटी में अपनी छोटी-छोटी बचत जमा करने के लिए खाते खोले थे. दिसंबर माह तक सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन उसके बाद जिस पोर्टल के माध्यम से वे पैसे जमा करते थे, वह अचानक बंद हो गया. इससे निवेशकों को आशंका है कि सोसायटी के संचालक फरार होने की तैयारी में हैं या पहले ही फरार हो चुके हैं।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है. पुलिस का मानना है कि जांच के दौरान पीड़ितों की संख्या और भी बढ़ सकती है. फिलहाल पुलिस सोसायटी के संचालकों की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच कर रही है. इससे पहले भी इस कंपनी के खिलाफ एक व्यक्ति ने ऑनलाइन पुलिस को शिकायत दी थी. 6 फरवरी 2025 को थाना छोटा शिमला में मु०नं० 12/25 धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता के तहत श्रीमती रीता वालिया निवासी अमर कुंज गांव रैहल डा०खा० हीरानगर तह०व जिला शिमला ने शिकायत दर्ज कराई थी।
सरकार के अधीन होने का दावा
एक फर्म ने इसके तथा कुछ अन्य लोगों के साथ 3.5 करोड़ रुपये की ठगी की है. इससे पहले कनलोग शिमला के रहने वाले व्यक्ति ने भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अधीन पंजीकृत होने का दावा करने वाली कोऑपरेटिव सोसाइटी के खिलाफ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. शिमला के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान में कार्यरत कर्मचारी ने इस बारे में ऑनलाइन माध्यम से पुलिस को शिकायत भी भेजी है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 से वह भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के तहत पंजीकृत ह्यूमन वेलफेयर मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड गिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड में निवेश कर रहे थे. कनलोग शिमला के रहने वाले उपेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने सोसाइटी में अपने नाम पर, अपनी पत्नी के नाम पर और अपने बच्चों के नाम पर आरडी करवाई थी. इसके अलावा सोसायटी के बॉन्ड्स भी खरीदे थे. कुल मिलाकर 8 लाख रुपये की राशि निवेश की गई थी. इसी तरह केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के अन्य कर्मचारियों ने भी इसी सोसायटी में पैसा लगाया था।
सीपीआरआई के कर्मचारियों का कुल मिलाकर 30 लाख रुपये की राशि कंपनी के पास है. जब आरडी और अन्य योजनाओं में लगाया पैसा निकालने का समय आया तो सोसायटी न तो किसी प्रकार की निकासी कर रही है और न ही पैसा जमा हो रहा है. सोसायटी का पोर्टल 3 दिसंबर से बंद है. सोसायटी की शिमला में भी शाखा है. हम इसके कार्यालय में भी गए, लेकिन हमें यह नहीं बताया जा रहा है कि उनका पैसा कब उन्हें लौटाया जाएगा. उनका आरोप है कि इसी प्रकार से देशभर से लोगों की 3 करोड़ से भी ज्यादा की राशि जमा है. इस बारे में पीड़ितों ने पुलिस महानिदेशक, प्रदेश सरकार और सभी जिलों के जिला उपायुक्त को भी ज्ञापन सौंपा है।
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