फॉरेस्ट गार्ड 2 साल की कॉन्ट्रेक्ट जॉब के तुरंत बाद होंगे परमानेंट : हाईकोर्ट ने आदेश किए जारी

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शिमला :  हिमाचल हाई कोर्ट 31 दिसंबर, 2020 से पहले अनुबंध आधार पर नियुक्त सैकड़ों वनरक्षकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इन वनरक्षकों को दो वर्ष का अनुबंध कार्यकाल पूरा करते ही 31 दिसंबर, 2022 से बिना भेदभाव नियमित करने के आदेश जारी किए। साथ ही संशोधित वेतनमान का लाभ देने के आदेश भी दिए।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने प्रार्थियों की याचिका को स्वीकारते हुए यह आदेश जारी किए। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं को उसी प्रक्रिया के तहत भर्ती किया गया था जिस प्रक्रिया के तहत वन वृत्त धर्मशाला में अनुबंध के आधार पर वनरक्षकों को नियुक्त किया गया था। वन वृत्त धर्मशाला के वनरक्षकों के नियमितीकरण की पद्धति और प्रक्रिया अन्य वृत्तों से भिन्न नहीं थी। याचिकाकर्ताओं को विभिन्न औपचारिकताओं को पूरा करने में लगे अतिरिक्त समय का हवाला देते हुए उन्हें बाद में नियमित किए जाने को सरकार ने सही ठहराने की कोशिश की।  कोर्ट ने कहा कि यदि प्रतिवादियों द्वारा जिन औपचारिकताओं का सहारा लिया जा रहा है, उनका वन वृत्त, धर्मशाला के अधिकारियों द्वारा समय पर अनुपालन किया गया है, तो यह समझने में विफल है कि अन्य वन वृत्तों के अधिकारियों द्वारा इनका अनुपालन क्यों नहीं किया जा सका।  अन्य वन मंडलों के अधिकारियों की ओर से की गई लापरवाही याचिकाकर्ताओं के लिए बाधा नहीं बन सकती और उन्हें किसी अन्य के कार्यों और चूक के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।

 कोर्ट ने पाया कि धर्मशाला सर्किल में अपने समकक्षों की तुलना में याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण में देरी ने उन्हें संशोधित वेतनमान के लाभों से भी वंचित कर दिया है। सरकार ने तीन जनवरी 2022 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान का लाभ देने के लिए पात्र माना है। याचिकाकर्ताओं को इस तिथि के बाद नियमित किया गया है और इस कारण उन्हें संशोधित वेतनमान के लाभ से वंचित किया गया है, जबकि उनके समकक्षों को तीन जनवरी, 2022 से पहले नियमित किया गया था। इसलिए उन्हें संशोधित वेतनमान संबंधी अधिसूचनाओं से लाभान्वित भी किया गया है।

  याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें भर्ती की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद वनरक्षकों के रूप में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था और कार्यालय आदेश एक फरवरी, 2022 के तहत उन्हें जनवरी, 2022 और फरवरी, 2022 में नियमित किया गया था, जबकि धर्मशाला में उनके समकक्षों को 31 दिसंबर, 2021 से नियमित किया गया था।  याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वन वृत्त, धर्मशाला में सेवारत उनके समकक्षों की तुलना में उनके नियमितीकरण की तिथि के आधार पर याचिकाकर्ताओं के साथ किया गया यह भेदभावपूर्ण व्यवहार है।

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