रोहित जसवाल। शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के विश्वविद्यालयों और सरकारी विभागों को सख्त संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि पैसों की कमी का रोना रोकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों का हक नहीं मारा जा सकता। कोर्ट ने दो टूक कहा कि पेंशन और रिटायरमेंट लाभ कोई खैरात या इनाम नहीं, बल्कि संविधान के आर्टिकल 21 (सम्मान से जीने का अधिकार) के तहत कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है। [1, 2]
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने डॉ. कमल शर्मा सहित 26 कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री (नौणी सोलन) को निर्देश दिए हैं कि वे 4 नवंबर 2026 तक (4 हफ्ते के भीतर) सभी बकाया लीव एनकैशमेंट का भुगतान करें। ऐसा न करने पर यूनिवर्सिटी को वास्तविक देय तिथि से 5% सालाना ब्याज देना होगा।
