बीबीएन, 5 जनवरी। (तारा) : विकास खंड पट्टा के बाड़ियाँ व पट्टा नाली के लोगों के पशुओं को नुकसान पहुंचाने वाते तेदुंए को आखिरकार पिंजरे में पकड़ लिया है। पिछले 6 माह से यह तेंदूआ लोगों के पशुओं को निवाला बना रहा था। 1100 पर लोगों ने शिकायत की। उसके बाद यहां पर एक माह से वन विभाग ने पिजंरा लगा रखा था। बीती रात तेदूंआ इस पिजंरे में कैद हो गया। जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। रुहान के समाजसेवी नागेंद्र जसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री संकल्प सेवा नम्बर 1100 पर की हुई शिकायत की थी जिसके बाद विभाग हरकत में आया।
पट्टा मेहलोग के कोंटा, चिओटा, समलोह, तलोग व रुहान गांव में ग्रामीण जंगली तेंदुए के आतंक से ग्रामीण परेशान थे जिसमे रोशन लाल जो रुहान गांव के निवासी है और बकरी पालन का काम करते है उनका पिछले 6 महीनो में तेंदुए ने एक दर्जन बकरियों को अपना शिकार बनाया था।
नागेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार तो रोशन लाल और हरविंदर कंवर दिन में तेंदुए के आगे से अपने पशुधन को छुड़वा चुके थे। रोशन लाल के लगभग 1 दर्जन से ज्यादा बकरियों को तेंदुआ उठा चुका है जिसमे 8 बकरियां और 5 छोटे बकरे थे, हरविंदर कंवर के भी 8 बकरियों को तेंदुआ अपना शिकार बना चुका था। इसी तरह बाकी ग्रामीणों की भी बकरियों को तेंदूआ अपना शिकार बना चुका था।
कोंटा के हरविंदर कंवर, नरेंद्र कंवर, तलोगी के ज्ञान चंद, रूवाह के विनोद कुमार और सलगा के रमेश कुमार ने बताया कि तेंदुए के पकड़े जानें से ग्रामीणों में बना हुआ भय का माहौल कम हुआ। तेदुंआ पशुधन के लिए ही नहीं बल्कि ग्रामीणों और विशेषकर स्कूली बच्चों के जान के लिए भी खतरा था। प्रभावित लोगो ने सरकार से नुकसान की भरपाई की मांग की है
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वन मंडलाधिकारी राज कुमार ने बताया कि लोगों की शिकायत पर विभाग ने एक माह से यहां पर पिंजरा लगाया था। पिंजरे के साथ दो बकरों को भी बांधते थे। बीत रात तेदूंआ पिंजरा में बकरे खाने आया और कैद हो गया। अब शिमला में रेसक्यू टीम को बुलाया गया है। टीम के आने के बाद पहले इसकी जांच की जाएगी। अगर यह स्वस्थ हुआ तो इसे वन्य प्राणी सेंचूरी में छोड दिया जाएगा।
