रोहित जसवाल। नंदपुर । हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक की नैहरी शाखा के कर्मचारी की सतर्कता से पंजोआ निवासी एक महिला साइबर ठगी के प्रयास में 1.50 लाख रुपये गंवाने से बच गई। हालांकि, महिला इससे पहले लोकमित्र केंद्र के माध्यम से 77 हजार रुपये कथित ठगों के खाते में भेज चुकी थी। बैंक कर्मचारी मोहम्मद आसिफ ने महिला की घबराहट को भांपते हुए मामले की जांच की और समय रहते प्रस्तावित एनईएफटी लेनदेन रुकवा दिया।
बैंक से मिली जानकारी के अनुसार, महिला 1.50 लाख रुपये एनईएफटी के माध्यम से दूसरे खाते में भेजने के लिए शाखा पहुंची थी। वह काफी घबराई हुई थी और जल्द से जल्द पैसे ट्रांसफर करवाना चाहती थी। उसकी असामान्य स्थिति को देखते हुए लिपिक मोहम्मद आसिफ ने उससे बातचीत की और परेशानी का कारण पूछा। शुरुआत में महिला ने जानकारी देने में हिचकिचाहट दिखाई, लेकिन भरोसा दिलाने पर उसने बताया कि उसे 10 लाख डॉलर से भरा बैग मिलने वाला है। इसके लिए उससे पहले 1.50 लाख रुपये जमा करवाने को कहा गया था।
व्हाट्सएप संदेशों से हुआ ठगी के प्रयास का खुलासा
महिला की बातों पर संदेह होने के बाद बैंक कर्मचारी ने उसके व्हाट्सएप संदेशों की जांच की। इनमें कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने और डॉलर से भरा बैग मिलने का लालच देने से जुड़े संदेश मिले। बैंक प्रबंधन के अनुसार, बैंक में छुट्टी होने के कारण महिला पहले ही लोकमित्र केंद्र के जरिए 77 हजार रुपये भेज चुकी थी। बैंक कर्मचारी ने संबंधित मोबाइल नंबर पर संपर्क किया तो दूसरी ओर से पैसे भेजने की बात कही गई।
उधार लेकर लाई थी 1.50 लाख रुपये
शाखा प्रबंधक गीतेश गुप्ता के अनुसार, महिला ने प्रस्तावित लेनदेन के लिए 1.50 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने इस पूरे मामले की जानकारी अपने पति या परिवार के अन्य सदस्यों को भी नहीं दी थी। बैंक कर्मचारियों ने महिला को समझाया कि उसके साथ साइबर ठगी करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद 1.50 लाख रुपये का प्रस्तावित लेनदेन रुकवा दिया गया और महिला को संभावित बड़े आर्थिक नुकसान से बचा लिया गया।
