सरोल में कबाड़ हो रही एंबुलेंस और बालू में पार्किंग को लेकर प्रशासन से मांगा जवाब
कहा, मासूम जिंदगियों की कीमत पर कब तक चलेगी लापरवाही?
एएम नाथ। चंबा : कुमहारका की बोबी की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्था और 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जय सिंह ने घटना पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर गंभीर स्थिति में 108 एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंच सकी? यदि आपातकालीन सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है?
जय सिंह ने कहा कि मामला केवल एक परिवार की त्रासदी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिस पर आम आदमी आपात स्थिति में भरोसा करता है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से पूछा कि घटना के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई और क्या इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने के लिए कोई जांच शुरू हुई है।
भाजपा नेता ने कहा कि बोबी की मौत के बाद उठे सवाल अब सीधे सरकार और प्रशासन की जवाबदेही से जुड़े हैं। जनता जानना चाहती है कि 108 सेवा में देरी की वास्तविक वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जय सिंह ने सदर विधायक पर भी विकास के दावों को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को घोषणाओं और दावों से ज्यादा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और समय पर आपातकालीन सेवाएं चाहिए। अब सवाल यह है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या जवाब देता है और क्या बोबी की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय होगी।
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अस्पताल से चार किलोमीटर दूर एंबुलेंस, मरीजों की जिंदगी किसके भरोसे?
भाजपा नेता जय सिंह ने मेडिकल कॉलेज से करीब चार किलोमीटर दूर बालू में एंबुलेंस की पार्किंग को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब मरीज की जिंदगी बचाने के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, तब एंबुलेंस को अस्पताल से इतनी दूरी पर रखने की व्यवस्था पर जवाब मिलना चाहिए।
उन्होंने सरोल में खड़ी एंबुलेंसों की स्थिति का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां दर्जनों एंबुलेंस कथित तौर पर कबाड़ में बदल रही हैं। सवाल यह है कि जिले में कुल कितनी एंबुलेंस उपलब्ध हैं, कितनी चालू हालत में हैं और आपात स्थिति में वास्तव में कितनी सेवाएं दे रही हैं?
