होशियारपुर/दलजीत अजनोहा : कम्युनिटी सेंटर में श्री श्याम सुंदर मखीजा जी के तत्वाधान में चल रही भक्तमाल कथा के विश्राम दिवस पर वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत परम श्रद्धेय श्री गौर दास जी महाराज ने आज श्री चैतन्य महाप्रभुजी के संक्षिप्त चरित्र का अद्भुत एवं सुंदर वर्णन करते हुए बताया की सनातन धर्म ही सबसे प्राचीन धर्म है बाकी जितने भी धर्म है सब इसकी शाखाएं हैं और इसी में से ही निकले हैं जैसे ईसाई धर्म ईसा मसीह जी ने शुरू किया था उनके पिताजी और दादाजी कौन से धर्म को मानते थे ऐसे ही इस्लाम धर्म पैगंबर मोहम्मद जी ने शुरू किया था पर उनके पिताजी और दादाजी परदादाजी सभी सनातन धर्म से ही निकले हैं ऐसे ही भगवान श्री राम भगवान श्री कृष्णा के पिताजी दादाजी परदादा जी आदि सब सनातन धर्म का ही पालन करते थे महाराज जी ने आगे बताया कि हम सभी सिख गुरुओं के ऋणी है जिन्होंने सनातन धर्म की रक्षा हेतु अपने और अपने बच्चों के प्राण कुर्बान कर दिए परंतु अपना धर्म नहीं बदला कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने बताया कि केवल सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है जो सबको यह संदेश देता है कि सभी सुखी हो सब का मंगल हो सब स्वस्थ रहें और आज भी इस बात को विश्व के सभी धर्म गुरु मानते हैं श्री चैतन्य महाप्रभु जी के संक्षिप्त चरित्र में महाराज श्री ने बताया की यह राधा कृष्ण जी का मिलित अवतार है और कलयुग में आज से लगभग 550 वर्ष पूर्व इस धरा पर सभी का कल्याण करने एवं राधा कृष्ण के प्रेम का दान करने पधारे अन्य अवतारों में तो प्रभु ने सब राक्षसों का एवं पापियों का संहार किया परंतु इस अवतार में महाप्रभु जी ने सभी से हरी नाम बुलवाकर सभी का उद्धार किया रावण कुंभकरण ने मरते वक्त राम नाम का कीर्तन नहीं किया कंस एवं अन्य राक्षसो ने भी मरते हुए हरे कृष्णा हरे कृष्णा का कीर्तन नहीं किया नहीं किंतु कलयुग में उन्हीं के अवतार जगाई मथाई उस समय के सबसे बड़े दुष्ट एवं पापी थे संसार का कोई ऐसा पाप नहीं था जो इन्होंने ना किया हो पर नित्यानंद जी जो की बलराम जी के अवतार है ने श्री चैतन्य महाप्रभु जी की आज्ञा से हरी नाम प्रचार करते हुए तुम उन दुष्ट जगाई मधाई से भी सब पाप छुड़वाकर उनसे हरी नाम बुलवाया जिन जगाई मधाई की शक्ल देखकर लोग पापी हो जाते थे महाप्रभु जी की कृपा से आज मधाईतला में उनका बहुत सुंदर मंदिर है और 75 वर्षों से निरंतर अनवरत कीर्तन चल रहा है क्योंकि जगाई मधाई से महाप्रभु जी ने सारे पाप संकल्प पूर्वक ग्रहण कर लिए थे और और यह दोनों प्रभु की आज्ञा से प्रतिदिन गंगा किनारे सफाई करते थे और महामंत्र नाम का जप करते थे
