असम कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे को लेकर एक नया मोड़ आता दिख रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को दावा किया कि वह 22 फरवरी को BJP में शामिल होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता भाजपा में शामिल होंगे।
बता दें कि भूपेन बोरा ने सोमवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, टॉप लीडरशिप के मनाने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया और कहा कि वह अपने फैसले पर दोबारा सोचेंगे। खबर है कि उन्हें मनाने वालों में राहुल गांधी भी शामिल हैं। हालांकि, मंगलवार को उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं सामने आने लगीं।
नितिन नबीन ने दिखा दी हरी झंडी
अपने बयान में हिमंत ने कहा कि नेशनल प्रेसिडेंट नितिन नबीन ने उनके शामिल होने को पहले ही मंजूरी दे दी है। भाजपा में उनका स्वागत है। उन्होंने कहा कि भूपेन बोरा को वह पूरा सम्मान दिया जाएगा जिसके वह हकदार हैं। बीजेपी में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा, क्योंकि यह उनके जैसे लोगों के लिए एक पार्टी है जो अपने पिता की राजनीति की विरासत को नहीं अपनाते।
बोरा के घर पहुंचे हिमंत बिस्व सरमा
इससे पहले सरमा गुवाहाटी के घोरमारा इलाके में बोरा के घर गए जहां उनकी पत्नी और बेटे ने आरती की और मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि बोरा के लिए भाजाप के दरवाजे खुले हैं और उन्हें रिजर्व सीट से विधानसभा चुनाव जिताने में मदद करने का वादा किया था।
पहले क्या कुछ बोले थे भूपेन बोरा?
इससे पहले दिन में असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा कि अगर केंद्रीय नेतृत्व कहेगा तो वह मंगलवार रात तक अपना इस्तीफा वापस लेने के बारे में अपना आखिरी फैसला बताएंगे। बोरा ने कहा कि वह आखिरी फैसला लेने से पहले अपने शुभचिंतकों, करीबी सहयोगियों और लखीमपुर जिले के लोगों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करना चाहेंगे।
क्यों कांग्रेस से रुष्ट हुए भूपेन बोरा?
बोरा ने किसी भी कांग्रेस नेता का नाम लिए बिना कहा कि वह असम प कांग्रेस कमेटी (APCC) में बने रहना चाहते हैं, लेकिन APCC(R) में नहीं। यह साफ तौर पर पार्टी के धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन का जिक्र था। उन्होंने कहा कि मैंने अपने इस्तीफे में भी यह साफ कर दिया है।
बोरा ने आरोप लगाया कि कई सीनियर नेताओं ने सामगुरी विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उनका नाम सुझाया था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। हुसैन के धुबरी लोकसभा सीट से चुने जाने के बाद सामगुरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव जरूरी हो गया था। पार्टी का टिकट उनके बेटे तंजील हुसैन को दिया गया, जो भाजपा के दिप्लू रंजन शर्मा से चुनाव हार गए।
राहुल ने नहीं मानी थी बोरा की बात!
बोरा ने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने AIUDF के साथ गठबंधन का विरोध किया था और उन्होंने इस बारे में पार्टी हाईकमान को कई चिट्ठियां लिखीं। चुनावों के बाद गठबंधन खत्म हो गया और हुसैन को इसका सबसे ज्यादा फायदा पिछले लोकसभा चुनावों में हुआ, जब उन्होंने AIUDF नेता बदरुद्दीन अजमल को रिकॉर्ड अंतर से हराकर सीट जीती।
