मणिपुर की घिनौनी हरकत के खिलाफ गढ़शंकर के जनसंगठनों ने विरोध प्रदर्शन कर फूंका मोदी का पुतला :

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गढ़शंकर, 23 जुलाई : न्याय एवं लोकतंत्र पसंद लोक फ्रंट के आह्वान पर गढ़शंकर क्षेत्र के विभिन्न जनवादी, जमहूरी व इनकलाबी संगठनों द्वारा बंगा चौक स्थित गांधी पार्क में रोष रैली पश्चात शहर में रोष प्रदर्शन करते मणिपुर में हो रही हृदयविदारक व अमानवीय घटनाओं के खिलाफ नंगल चौक में केंद्र की मोदी सरकार का पुतला फूंका गया।
इस मौके पर विभिन्न संगठनों के नेता मुकेश कुमार, दर्शन मट्टू कुलभूषण महिंदवानी, सुखदेव डांसीवाल, हरमेश ढेसी, ​​मक्खन सिंह वाहिदपुर, रणबीर बब्बर, कैप्टन करनैल सिंह, मैडम मनदीप कौर गुरे, तर्कशील नेता सतपाल सलोह, शाम सुंदर, नरिंदर कुमार, तलविंदर हीर, सरूप चंद, पवन भंमियां, रामजी दास, प्रिंसिपल बिक्कर सिंह, रामजीत सिंह सरपंच, बीबी शुभाष मट्टू, कमला देवी, हंस राज गढ़शंकर, मलकीत बाहोवाल ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 77 दिनों से केंद्र और राज्य सरकार के गैरजिम्मेदाराना कार्यों के कारण मणिपुर में दो आदिवासी समुदायों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है और महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया और मनु सिमरती लागू करने वाली ताकतों ने बिना किसी डर के वीडियो बनाया और उसे वायरल कर दिया। 4 मई को जब यह घटना हुई तो पुलिस में मामला भी दर्ज कराया गया, लेकिन पुलिस की ओर से कार्रवाई न होना सरकार की कार्यपालिका पर संदेह पैदा करता है। ऐसी कई घटनाओं को मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकार करना राज्य की जनता की अमानवीयता, रोष, प्रताड़ना को दर्शाता है। इन शोक संतप्त महिलाओं में से एक के पति, एक पूर्व सैनिक, जो कारगिल युद्ध में असम रेजिमेंट से लड़े थे, के शब्द “देश को तो बचा लिया लेकिन अपने गांव और अपनी पत्नी की बेपत्ती को नहीं बचा सके” हर भारतीय नागरिक के दिल को झंझोड़ते हैं।
इस अवसर पर विभिन्न नेता हरबंस रसूलपुर, निरंजन चांदपुरी, देविंदर राणा, हरभजन अटवाल, हरनेक सिंह बंगा, गुरमेल सिंह कलसी, बलविंदर सिंह, प्रदीप गुरु, जीत बगवाईं, सोहन टोनी, जरनैल सिंह, विनय कुमार, नरेश कुमार, लेक्चरर दलबीर सिंह, मेजर सिंह, राज कुमार, बलवंत राम, तरलोक सिंह मिंटू, रेशम चित्रकार, विनोद कुमार, गुरनाम सिंह, जगदीश कुमार, हरदेव राय, हरि राम नफ़री, सतनाम सिंह, जुझार सहूंगड़ा, भूपिंदर सिंह सरोआ, सतपाल सिंह जगदीप कुमार, संजीव कुमार, डॉ. सुरजीत सिंह2 मंगत रॉय, मैडम प्रियंका ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जो सांप्रदायिक समूह मनु सिमृति की वापसी को बढ़ावा दे रहे हैं, जो लोकतंत्र के झंडे लहराते हुए राज्य के साथ असामाजिक गतिविधियां कर रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। लोग अब धार्मिक और क्षेत्रीय विभाजन बर्दाश्त नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस पर संज्ञान लेने के बाद प्रधानमंत्री का चुप्पी तोड़ना अपने आप में बेहद निंदनीय है। अंत में किसान नेता कुलविंदर चाहल ने न्यायप्रिय लोगों और जनसंगठनों के सहयोग से मणिपुर की आदिवासी महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए फाशीवादी मोदी सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन कर मोदी सरकार का पुतला फूंकने और संघर्ष में शामिल होने के लिए सभी संगठनों के कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया।
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