महायुद्ध शुरु….अमेरिका ने ईरान के ‘ऑयल हब’ खार्ग आइलैंड पर किया भीषण हमला; मिडिल ईस्ट में मचा हड़कंप

by

मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए ‘मिडनाइट अल्टीमेटम’ की समय सीमा समाप्त होने से पहले ही अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले ‘खार्ग आइलैंड’ को निशाना बनाया है। यह हमला इतना भीषण था कि इसकी गूंज पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुनी गई और इसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम मचा दिया है।

ईरान की आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार

खार्क आइलैंड पर हुआ यह हमला ईरान के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक झटका है। जानकारों का मानना है कि यह द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है क्योंकि देश का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से निर्यात किया जाता है।

अल-अरबी टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमलों ने न केवल तेल डिपो को तबाह किया है बल्कि द्वीप पर स्थित महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और मिसाइल डिपो को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। धमाके इतने जोरदार थे कि पूरे द्वीप में उनकी गूंज महसूस की गई जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका ने ईरान की तेल निर्यात क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाने की योजना बनाई है।

डेडलाइन से पहले ट्रंप का ‘तगड़ा प्रहार’ : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पने ईरान को सीजफायर और समझौते के लिए 8 अप्रैल की सुबह 5 बजे (भारतीय समयानुसार) तक की अंतिम चेतावनी दी थी। ट्रंप ने वादा किया था कि डेडलाइन खत्म होने पर ईरान पर ‘तगड़ा अटैक’ किया जाएगा लेकिन अमेरिकी वायुसेना ने समय सीमा से पहले ही ईरान की आर्थिक रीढ़ कहे जाने वाले खार्ग द्वीप पर बमबारी शुरू कर दी।

वैश्विक तेल बाजार पर असर

इस हमले का सीधा और तत्काल प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ईरान के तट का अधिकांश हिस्सा उथला होने के कारण बड़े तेल टैंकर केवल खार्क द्वीप पर ही लंगर डाल सकते हैं ऐसे में इस केंद्र की तबाही दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर सकती है।

ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व

खर्च डीप केवल एक तेल डिपो नहीं है बल्कि इसे ‘फारस की खाड़ी का अनाथ मोती’ भी कहा जाता है। यहां 7वीं शताब्दी के ईसाई मठ के अवशेष और प्राचीन अचमेनिड शिलालेख जैसे ऐतिहासिक खजाने भी मौजूद हैं। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और रणनीतिक गहराई के कारण यह ईरान का सबसे संवेदनशील क्षेत्र रहा है जिस पर अब युद्ध के काले बादल छाए हुए हैं।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

पिपलू मेले का भव्य आगाज, उपमुख्यमंत्री ने की राज्य स्तरीय दर्जे की घोषणा

रोहित जसवाल।  बंगाणा (ऊना), 5 जून. ऊना जिले के कुटलैहड़ क्षेत्र में आयोजित ऐतिहासिक तीन दिवसीय जिला स्तरीय पिपलू मेले का गुरुवार को भव्य आगाज हुआ। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने श्री नरसिंह मंदिर में...
article-image
पंजाब

किसानों से किए वायदे मुताबिक एमएसपी पर कानून लेकर आए केंद्र सरकार: सांसद मनीष तिवारी

अभी तक ना तो एमएसपी पर कानून बना और ना ही स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू हुई – सांसद मनीष तिवारी चंडीगढ़, 8 फरवरी: श्री आनंदपुर साहिब से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष...
पंजाब , हिमाचल प्रदेश

सुरीले साजों पर गूंजी स्वर लहरियां : माता श्री चिंतपूर्णी महोत्सव-2024 के लिए ऑडिशन आरंभ

रोहित भदसाली। ऊना, 2 सितंबर. माता श्री चिंतपूर्णी महोत्सव-2024 में सांस्कृतिक संध्याओं के लिए ऑडिशन अंब कॉलेज के सभागार में आरंभ हो गए हैं। पहले दिन स्थानीय कलाकारों ने ऑडिशन में भाग लिया और...
article-image
हिमाचल प्रदेश

घरेलू सिलिंडरों की उपलब्धता पर प्रतिदिन समीक्षा करेंगे सभी उपायुक्त

एएम नाथ। शिमला :  राज्य में घरेलू सिलिंडरों की उपलब्धता पर सभी उपायुक्त प्रतिदिन समीक्षा करेंगे। वह इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को देंगे। यह निर्देश मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने जारी किए हैं। मुख्य...
Translate »
error: Content is protected !!