एएम नाथ । शिमला : हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की गुमशुदगी के मामलों ने गंभीर सामाजिक चिंता पैदा कर दी है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 2,489 महिलाएं लापता हुईं, जिनमें से 2,031 मामलों में अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।
सरकारी और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन मामलों में एक बड़ा हिस्सा उन महिलाओं का है जो या तो अचानक घर से गायब हो गईं या फिर संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गईं। कई मामलों में परिवारों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन जांच के बावजूद लंबे समय तक कोई सफलता नहीं मिल सकी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लापता मामलों की जांच अलग-अलग स्तरों पर की जा रही है। कुछ मामलों में तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सुराग मिले हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मामले अब भी अनसुलझे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आंकड़े केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती ही नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे से जुड़ी समस्याओं की ओर भी इशारा करते हैं। इनमें मानव तस्करी, घरेलू विवाद, आर्थिक दबाव और सामाजिक असुरक्षा जैसे कारण शामिल हो सकते हैं।
राज्य प्रशासन ने कहा है कि गुमशुदगी के मामलों की निगरानी के लिए विशेष सेल सक्रिय किए गए हैं और जांच प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, लापता व्यक्तियों की ट्रैकिंग और रिकवरी के लिए तकनीकी संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में महिलाएं बाद में सुरक्षित मिल भी जाती हैं, लेकिन बड़ी संख्या में अनसुलझे केस चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे मामलों को कम करने के लिए जागरूकता अभियान और पुलिसिंग सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
समाजसेवियों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और त्वरित पुलिस कार्रवाई बेहद जरूरी है।
फिलहाल, राज्य सरकार ने सभी जिलों को गुमशुदगी मामलों की समीक्षा करने और लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं, ताकि इस गंभीर समस्या का समाधान निकाला जा सके।
