एएम नाथ। शिमला: मजदूरों, किसानों, खेतिहर मजदूरों, आंगनबाड़ी, आशा, मिड-डे मील, आउटसोर्स और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की मांगों को लेकर सीटू और हिमाचल किसान सभा ने 10 अगस्त को जेल भरो आंदोलन करने का ऐलान किया है। यह आंदोलन शिमला समेत हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किया जाएगा।
सीटू और किसान सभा ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में यह आंदोलन करने का निर्णय लिया है। संगठनों का आरोप है कि सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण बेरोजगारी, महंगाई और श्रमिकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों से मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों पर भी असर पड़ा है।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि आंगनबाड़ी, आशा, मिड-डे मील और अन्य स्कीम वर्करों को लंबे समय से नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। उन्होंने मांग की कि इन कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, मेडिकल सुविधा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।
संगठनों ने मनरेगा को मजबूत करने, ग्रामीण रोजगार की गारंटी को प्रभावी बनाए रखने और कृषि क्षेत्र को कॉरपोरेट नियंत्रण से बचाने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, कृषि नीति और बीज नीति समेत केंद्र सरकार की विभिन्न आर्थिक नीतियों का विरोध किया गया है।
सीटू और किसान सभा ने कहा कि यदि मजदूरों और किसानों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
