मुकेश अग्निहोत्री ही तोड़ सकते हैं हमीरपुर संसदीय सीट पर भाजपा का तिलसम : हमीरपुर संसदीय सीट पर लगी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व अनुराग के साथ प्रदेश के सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू व उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की छवि दाव पर 

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हमीरपुर लोकसभा सीट से काग्रेस को आखिरी बार 1996 में मिली थी जीत

एएम नाथ। हमीरपुर :  लोकसभा चुनावों को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक तपस तेजी से बढ़ती जा रही है। भाजपा द्वारा मंडी लोकसभा हलके से कंगना रनोत को मैदान में उतारने से मंडी सीट चर्चा में बनी हुई है। मगर हिमाचल प्रदेश के लोकसभा हलका हमीरपुर पर सबकी नजर रहेगी। क्योंकि हमीरपुर लोकसभा सीट पर एक ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय कैबिनट मंत्री और भाजपा के तेजतर्रार नेता एवं भाजपा के प्रत्याशी अनुराग ठाकुर तो दूसरी ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व काग्रेस में चुनावी रणनीति के चाणक्य माने जाने वाले प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री की साख दांव पर लगी हुई है। क्योंकि यह चारों दिग्गज लोकसभा सीट हमीरपुर से संबंधित हैं। हालांकि काग्रेस ने अभी तक हमीरपुर लोकसभा सीट के लिए कोई उम्मीदवार फाइनल नहीं किया है।काग्रेस को लगातार पिछले आठ चुनावों में हार का सामना करना पड़ रहा है और इस बार भी अभी तक प्रस्थितियां भाजपा के पक्ष में दिखाई दे रही हैं। इन हालातों में हमीरपुर सीट पर भाजपा का तिलसम तोडने का उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ही अकेले मादा रखते हैं।
                                                मुकेश अग्रिहोत्री यहां लोकसभा चुनाव में भाजपा का किला धवस्त करने का मादा रखते है। वहीं प्रदेश में विधानसभा की 6 सीटों पर हो रहे उपचुनावों में से चार सीटें सुजानपुर, बड़सर, कुटलैहड़ और गगरेट इसी लोकसभा सीट में पड़ती है। अगर काग्रेस मुकेश अग्रिहोत्री को हमीरपुर सीट से मैदान में उतारती है तो इन चारों सीटों पर भी काग्रेस को फायदा होना तय माना जा रहा है। प्रदेश में काग्रेस सरकार पर बना हुया संकट भी दूर हो सकता है। हालांकि ऊना से पूर्व विधायक सतपाल रायजादा को काग्रेस द्वारा मैदान में उतारे जाने की चर्चा है। मुकाबला तो रायजादा दे सकते हैं लेकिन उसके लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को बहुत ज्यादा पसीना बहाना पड़ेगा । अन्यथा विधानसभा उपचुनाव वाली चार सीटों पर भी खेल बिगड़ सकता है और काग्रेस सरकार के लिए संकट और गहरा सकता है।
                                          हमीरपुर लोकसभा सीट से काग्रेस को आखिरी बार जीत 1996 में मिली थी। 1996 में काग्रेस ने गगरेट विधानसभा हलके से संबंधित सेवानिवृत मेजर जनरल बिक्रम सिंह को लोकसभा सीट हमीरपुर से टिकट दी थी। उन्होंने दो बार हमीरपुर से सांसद चुने गए भाजपा के कद्दावार नेता प्रेम कुमार धूमल को पटखनी देकर जीत दर्ज की थी। लेकिन उसके बाद 1998, 1999 और 2004 में भाजपा के सुरेश चंदेल ने जीत दर्ज की और 2007 में हुए उपचुनाव में भाजपा के प्रेम कुमार धूमल फिर से सांसद चुने गए। प्रेम कुमार धूमल के मुख्यमंत्री बनने पर 2008 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे अनुराग ठाकुर को भाजपा ने चुनावी मैदान में उतारा और अनुराग ठाकुर जीत गए। लोकसभा चुनाव 2009, 2014 व 2019 में अनुराग ठाकुर ने जबरदसत जीत दर्ज की। इस दौरान काग्रेस ने राम लाल ठाकुर, नरेंद्र ठाकुर और रजिंद्र राणा को बदल-बदल कर मैदान में तो उतारा लेकिन काग्रेस को जीत दिलाने में सभी असफल रहे। इस बार परिस्थितियां पूरी तरह बदली हुई हैं। जिसके चलते अगर काग्रेस मुकेश अग्रिहोत्री पर दांव खेल देती है तो यहां मुकाबला रौचक होगा वहीं काग्रेस भाजपा का तिलसम तोडऩे के साथ चारों विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनावों में भी फ्रंट फुट पर आ जाएगी।
                                       हमीरपुर लोकसभा हलके में जिला हमीरपुर व ऊना विधानसभा की पांच-पांच सीटें, जिला बिलासपुर की चार सीटें, जिला कागड़ा की दो सीटें और जिला मंडी की एक सीट पड़ती है। इन 17 सीटों में से गत विधानसभा चुनावों में काग्रेस ने दस सीटों पर, भाजपा ने पांच सीटों पर और दो पर निर्दलीय जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। सांसद अनुराग ठाकुर के जिले हमीरपुर की पाचों सीटों पर भाजपा बुरी तरह हार गई थी। नादौन से सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित पाचों सीटों पर काग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। सांसद अनुराग ठाकुर के गुह क्षेत्र हमीरपुर में तो निर्दलीय आशीष शर्मा ने बड़ी जीत दर्ज की। काग्रेस दूसरे नंबर पर और भाजपा तीसरे नंबर पर चली गई थी। जिसके बाद अनुराग ठाकुर पर तरह-तरह के प्रश्न चिन्ह भी लगे थे। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। दो निर्दलीय विधायकों सहित काग्रेस के बागी हुए चार पूर्व विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। यह सभी बड़े मार्जिन से जीत कर विधानसभा में पहुंचे थे। इसके अलावा हिमाचल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि अनुराग ठाकुर से कई भाजपा नेताओं सहित भारी संख्यां में कार्याकर्ताओं में नराजगी पाई जा रही है। इस बात का जिक्र भाजपा की मींटिगों में कार्यकर्ता व नेतागण करते रहते हैं। लेकिन अभी तक खुल कर कोई सामने आकर नहीं बोल रहा।  पहली बार है कि लोकसभा हलका हमीरपुर के अंर्तगत पड़ते विधानसभा हलकों में से ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री आते है। अगर फिर भी दोनों काग्रेस को लोकसभा और सभी चार विधानसभा सीटों पर जीत दिलाने में नाकाम रहते है तो उनकी छवि पर भी आंच आनी तय है। इसके साथ ही प्रदेश की काग्रेस सरकार पर मंडरा रहा खतरा और गहरा हो सकता है। इसलिए काग्रेस को हमीरपुर लोकसभा सीट से मजबूत उम्मीदवार उतारना पड़ेगा। जिसके चलते काग्रेस के पास मुकेश अग्रिहोत्री सबसे मजबूत उम्मीदवार हो सकते हैं। अगर मुकेश अग्रिहोत्री चुनावी समर में उतरने को तैयार नहीं होते तो काग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर या सतपाल रायजादा को टिकट देकर चुनावी रण में उतारे जाने की संभावना है।
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