युद्ध का भारत से सीधा संबंध नहीं, फिर भी बढ़ रही है कालाबाज़ारी: सुमित सिंगला

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बी बी एन, 13 मार्च (तारा) : उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस युद्ध का भारत से सीधे तौर पर कोई लेना-देना नहीं है, उसके बावजूद देश में कई जरूरी वस्तुओं की कालाबाज़ारी शुरू हो गई है। गैस से लेकर दवाइयों के निर्माण में उपयोग होने वाले एपीआई और पैकेजिंग मटेरियल तक के दाम तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं।
इस मौके पर क्योरटेक ग्रुप के एमडी तथा अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष सुमित सिंगला ने कहा कि समाज में यह चिंता बढ़ती जा रही है कि जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे रिश्तों और मानवीय मूल्यों में गिरावट आती जा रही है। कठिन समय में लोग एक-दूसरे का सहारा बनने के बजाय मौके का फायदा उठाने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक समय भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था, लेकिन आज ऐसा महसूस हो रहा है कि हमारे संस्कार, संस्कृति और नैतिक मूल्य धीरे-धीरे कमजोर होते जा रहे हैं।
सुमित सिंगला के अनुसार, फिलहाल जो युद्ध चल रहा है उसका भारत से सीधा संबंध नहीं है। यह संभव है कि कुछ कच्चे माल के लिए हम अन्य देशों पर निर्भर हों, लेकिन देश में जिस तरह से छोटी-छोटी चीजों से लेकर कई आवश्यक वस्तुओं तक के दाम बढ़ाए जा रहे हैं, वह चिंता का विषय है। कई उत्पादों की कीमतों में 10 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि फार्मा इंडस्ट्री की बात करें तो भारत लगभग 90 प्रतिशत एपीआई के लिए चीन पर निर्भर है। हालांकि चीन में ऐसी कोई युद्ध जैसी स्थिति नहीं है, फिर भी चीन से आने वाले कच्चे माल के दाम भारत में कई गुना बढ़ा दिए गए हैं।
जानकारों के अनुसार, चीन से ऑर्डर किए गए माल को कंटेनर के माध्यम से भारत पहुंचने में लगभग 20 से 30 दिन का समय लगता है। ऐसे में युद्ध शुरू हुए अभी 10 दिन भी नहीं हुए हैं, फिर भी कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी होना कई सवाल खड़े करता है।
उद्योग जगत का मानना है कि चाहे निर्माता हों या व्यापारी, कई लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर कालाबाज़ारी कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी है कि वह इस पर सख्त नजर रखे, ताकि उद्योगों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।

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