चंडीगढ़ : पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के खिलाफ कथित बयान को लेकर विवादों में घिरे नेता प्रताप सिंह बाजवा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा उनके खिलाफ शुरू की जा रही कार्रवाई तथा 9 फरवरी को जारी नोटिस पर अगले आदेशों तक रोक लगा दी है।
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग और कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में अगली सुनवाई तक आयोग की ओर से बाजवा के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
याचिका में प्रताप सिंह बाजवा ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपने किसी भी बयान में जातिसूचक टिप्पणी नहीं की है, बावजूद इसके आयोग द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जो पूरी तरह से अनुचित और कानून के विपरीत है।
विपक्ष के नेता बाजवा ने हाईकोर्ट दलील दी कि आयोग द्वारा जारी नोटिस तथ्यों के विपरीत है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि आयोग के चेयरमैन जसबीर सिंह गढ़ी मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के करीबी मित्र हैं, इसलिए इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। बाजवा ने कहा कि इस स्थिति में चेयरमैन को मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बाजवा ने अपनी याचिका में आयोग के चेयरमैन के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की है।
उन्होंने अदालत को बताया कि चेयरमैन द्वारा सार्वजनिक रूप से यह कहा गया था कि “अगर कार्रवाई की जाती है तो ये अपने पापा के पास चले जाते हैं, हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट,” जो न्यायालयों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।याचिका में कहा गया है कि इस तरह की टिप्पणी न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचती है और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति गलत संदेश देती है, इसलिए इस पर उचित कानूनी कार्रवाई जरूरी है। दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आयोग और संबंधित पक्षों से जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया कि मामले के सभी तथ्यों और रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल अदालत के आदेश से बाजवा को राहत मिल गई है और आयोग द्वारा जारी नोटिस तथा प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लग गई है
