वृंदावन नाव हादसे की तस्वीरें : 11 लाश मिल चुकीं, अभी बॉडी खोज रहे आर्मी-पुलिस के 250 जवान

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बृंदावन में यमुना नदी पर हुए नाव हादसे ने हड़कंप मचा दिया। श्रद्धालुओं से भरी नाव पांटून पुल से टकराकर पलट गई, जिसमें 25-30 लोग सवार थे। अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लापता लोगों की तलाश के लिए आर्मी, पुलिस, NDRF रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।

वृंदावन की यमुना से निकलीं 11 लाशें

उत्तर प्रदेश में मथुरा के वृंदावन में शुक्रवार को जो भयानक नाव हादसा हुआ उसने हर किसी को झकझोर दिया। कृष्ण की नगरी में हादसे को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। कैसे यमुना में नाव पलट गई और दर्जनों लोग डूब गए। जानकारी के मुताबिक, अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। वहीं रेस्क्यू टीम ने 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है। लेकिन 4 लोग अभी तक लापता हैं। जिनकी तलाश के लिए पिछले 15 घंटे से आर्मी-पुलिस समेत 250 की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई है।

श्री बांके बिहार मंदिर के पास हुआ हादसा

दरअसल, यह भीषण हादसा शुक्रवार दोपहर तीन बजे से चार के बीच श्री बांके बिहार मंदिर से करीब ढाई किमी की दूरी पर हुआ। डीआईजी आगरा शैलेश पांडे ने बताया कि नाव में करीब 25 से 30 लोग सवार थे। लेकिन अचानक से नाव पांटून पुल से टकरा हयी और यह दुर्घटना हुई।

वृंदावन में इसलिए हुआ यह भयानक हादसा

पुलिस की शुरूआती जांच में पता चला है कि वोट चालक ने किसी भी श्रद्धालु को लाइफ जैकेट नहीं दी थी। अगर उन्होंने जैकेट पहनी होती तो शायद यह हादसा इतना भयानक नहीं होता। पुलिस ने आरोपी नाविक पप्पू निषाद को हिरासत में लिया है। नाव उसकी खुद की थी। उसने श्रद्धालुओं को जुगल घाट से बैठाया था। हादसे के बाद फरार हो गया था।

आर्मी-पुलिस और NDRF की टीमें तैनात

बता दें कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ, आर्मी-पुलिस स्थानीय गोताखोर समेत मेडीकल टीम मौके पर तैनात हैं। वह यमुना नदी में कड़ी धूप में लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। जल्द ही बाकी लोगों को सुरक्षित बचा लिया जाएगा।

पंजाब के लुधियाना रहने थे श्रद्धालु

मथुरा और वृंदावन पुलिस के मुताबिक हादसे के शिकार हुए श्रद्धालु पंजाब के लुधियाना रहने वाले बताए जाते हैं, जो वृदावंन में दर्शन-पूजन के लिए आए थे। नाविक ने इन श्रद्धालुओं को जुगल घाट से बैठाया था।

कीचड़ और रेत में भी शव दबे हो सकते हैं

मौके पर भारी भीड़ भी जुटी हुई है। वहीं जिन लोगों की लाशें मिली हैं उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बता दें कि यमुना का बहाव तेज है, इसलिए लोग बहकर दूर जा सकते हैं। वहीं नदी में कीचड़ और रेत में भी शव दबे हो सकते हैं। 24 घंटे बाद शव फूलकर ऊपर आ सकते हैं।

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