व्यवस्था परिवर्तन नहीं फैसला परिवर्तन की सरकार चला रहे सुक्खू : जयराम ठाकुर

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सुबह के फैसले शाम तक बदलने वाले फैसले कौन ले रहा है, पल-पल क्यों पलट रही है सरकार

एएम नाथ। मंडी : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर फैसला परिवर्तन की सरकार चला रहे हैं। जहां सुबह के फैसले शाम को बदल दिए जाते हैं और शाम के अपने उन फैसलों के दूरगामी परिणामों को सोच कर फैसला नहीं लिया जाता और ना ही तार्किकता के आधार पर। आए दिन सरकार कोई न कोई आदेश निकालती है जिसकी पूरे प्रदेश में किरकिरी होती है और वह फैसला अगले दिन वापस हो जाता है। इतना कन्फ्यूजन की स्थिति क्यों है? सबसे बड़ा सवाल है कि 1 दिन भी न टिकने वाले फैसले आखिर कौन ले रहा है? व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार पल-पल पलटू की सरकार हो गई है। मुख्यमंत्री प्रदेश से लेकर देश के कोने-कोने में विधानसभा से लेकर पब्लिक आयोजनों में सफेद झूठ बोलते हैं और सरकार के फैसले हर दिन प्रदेश और सरकार की किरकिरी कराते हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री की बेबसी यह है कि जन विरोधी, तर्कहीन, विवेकहीन, बेतुके फैसले लेने वाले लोगों पर कार्रवाई भी नहीं कर पा रहे हैं। प्रदेश में अराजकता और भ्रष्टाचार को खुलकर संरक्षण मिल रहा है। सिर्फ अप्रैल महीने में ही व्यवस्था परिवर्तन की सरकार द्वारा दिए गए दर्जनों फैसले बदलने पड़े। सभी फैसले इसलिए वापस लेने पड़ रहे हैं क्योंकि उन फैसलों में ना तो जनहित था, ना ही प्रदेशहित और ना ही दूरदर्शिता। अगर कुछ फैसला सरकार नहीं बदलती है तो वह फैसला माननीय न्यायालय द्वारा बदल दिए जाते हैं। सरकार के द्वारा समय-समय पर अनेक जन विरोधी फैसले लिए गए, जिसे मुख्यमंत्री मास्टर स्ट्रोक बताते रहे, लेकिन वह फैसले माननीय न्यायालय की समीक्षा में कहीं नहीं टिके। सिर्फ पंचायत चुनाव के मामले में ही सुक्खू सरकार के आधा दर्जन फैसले माननीय न्यायालय द्वारा संविधान और कानून के विपरीत बताकर पलटे गए। टॉयलेट टैक्स से लेकर टोल टैक्स, अस्पताल और स्कूल बंद करने से लेकर संस्थान—सरकार के न जाने कितने फैसलों ने प्रदेश की किरकिरी करवाई है।
बीते कल ही सरकार ने स्कूलों के मर्जर से जुड़े अपने फैसले को पलटकर अलग-अलग चलाने का फैसला दिया। 18 अप्रैल को जीएडी ने दिल्ली और चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन और सदन तथा शिमला स्थित विली पार्क के किराए में ढाई गुना वृद्धि कर दी, अगले दिन फैसला पलट दिया। 7 अप्रैल को सरकार द्वारा किसी भी हाल में एक्सटेंशन न देने का मोस्ट अर्जेंट लेटर जारी हुआ और उसी शाम लोक निर्माण विभाग द्वारा एक व्यक्ति की पुनर्नियुक्ति कर दी गई। बाद की कैबिनेट फैसलों में भी थोक में पुनर्नियुक्तियों के आदेश निकाले गए। हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले एंट्री टैक्स में ढाई गुना बढ़ोतरी कर दी गई, बाद में उस फैसले में आंशिक बदलाव करना पड़ा। विधानसभा का सत्र चल रहा था कि सरकार ने 1 अप्रैल को कर्मचारियों के रेगुलराइजेशन में रेगुलराइजेशन की तिथि से ही वरिष्ठता देने का पत्र जारी किया और अगले दिन विरोध होने पर उसे वापस ले लिया। कभी सरकार समोसे पर सीआईडी जांच करवाती है और उसे स्वीकार करने से भागती है। मंत्री सदन में झूठ बोलते हैं और पकड़े जाने पर पलटते हैं। कभी एचआरटीसी की बसों में राहुल गांधी के खिलाफ किसी यात्री द्वारा कोई वीडियो चलाए जाने पर कंडक्टर और ड्राइवर को नोटिस इशू किया जाता है और पब्लिक के दबाव में उसे वापस लेना पड़ता है। इस तरीके से एक नहीं, सैकड़ों ऐसे फैसले हैं जिसे सरकार ने वापस ले लिया। यह प्रदेश में बेलगाम होती अफसरशाही और कमजोर पड़ते मुख्यमंत्री के कारण हो रहा है।
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मंडी के चक्कर प्लांट में दूध फेंकने वाले किसान का दूध न खरीदने का फरमान हिटलरशाही

जयराम ठाकुर ने बार-बार दूध न खरीदने की वजह से परेशान होकर दूध फेंकने वाले किसान का दूध न खरीदने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस की झूठी गारंटी, मुख्यमंत्री की फ्लैगशिप योजना, सुक्खू जी के पूरे देश में दूध के नाम पर ढिंढोरा पीटने की पोल खुलते ही सुक्खू सरकार तानाशाही पर उतर आई है। दूध न खरीदे जाने से परेशान होकर जिस दिन दुग्ध उत्पादक ने चक्कर प्लांट के सामने मजबूरन दूध फेंका था, हमने उसी दिन कहा था कि अब सरकार विरोध करने वाले किसानों को ही प्रताड़ित करेगी। इसके पहले आपदा में सड़कें बंद होने से सड़ रही सब्जी और सेब फेंकने वालों पर भी सरकार ने जुर्माने लगाए हैं, मुकदमे दर्ज करवाकर प्रताड़ित किया है। लोगों की समस्याएं सुनने, उनका समाधान करने के बजाय उनकी आवाज ही दबा दो, जिससे बाकी लोग भले परेशान हों लेकिन अपनी आवाज न उठाएं। यही सुक्खू सरकार का “व्यवस्था परिवर्तन” है। सुक्खू जी, भारत लोकतांत्रिक देश है और लोगों को अपनी बातें कहने का अधिकार है। देवभूमि में हिटलरशाही नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री जी को याद होना चाहिए कि तानाशाहों का हश्र बहुत बुरा हुआ है।

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