नुकसान का आकलन करेगी जिला प्रशासन की कमेटी
एएम नाथ। शिमला : राजधानी शिमला के चलौंठी क्षेत्र में फोरलेन परियोजना के तहत बन रही टनल एक बार फिर नुकसान की वजह बन गई है।
टनल निर्माण के चलते एक छह मंजिला मकान में गंभीर दरारें आने के बाद प्रशासन ने एहतियातन उसे खाली करवा दिया। देर रात लगभग 10 बजे मकान में रह रहे 15 परिवारों को कड़ाके की ठंड के बीच घर छोड़ना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने नुकसान के आकलन के लिए एसडीएम शिमला ग्रामीण की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है। उपायुक्त ने बताया कि सूचना मिलते ही प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रभावित मकान को खाली करवाया और लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। फिलहाल फोरलेन निर्माण कार्य को पूरी तरह से रोक दिया गया है।
मकान में रह रहे किराएदारों के अनुसार करीब तीन दिन पहले मकान की दीवारों पर हल्की दरारें दिखाई देने लगी थीं, जो धीरे-धीरे गंभीर होती चली गईं।
मकान के ठीक नीचे फोरलेन की टनल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा आसपास के अन्य मकानों और सड़क पर भी दरारें देखी गई हैं, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
उपायुक्त ने बताया कि गठित कमेटी में एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा के अलावा तहसीलदार संजीव गुप्ता, एसडीओ पीडब्ल्यूडी महावीर कश्यप और एसडीओ डीआरडीए प्रदीप मेहता शामिल हैं।
यह कमेटी एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
वहीं, स्टेट जियोलॉजिस्ट ने भी नुकसान के कारणों की जांच शुरू कर दी है और एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देने की बात कही है।
मलबे से भर गई टनल
चलौंठी क्षेत्र में जिस टनल के दोनों छोर 23 दिसंबर को मिल गए थे, उसकी कुल लंबाई करीब 410 मीटर है। टनल का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से किया गया था। हालांकि, हाल ही में किए गए विस्फोट के बाद टनल के भीतर भारी मात्रा में मलबा भर गया, जिससे टनल पूरी तरह बंद हो गई है।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर सदानंद मोहंती ने पुष्टि की है कि टनल में मलबा भर गया है और इसके कारणों की जांच की जा रही है।
