गढ़शंकर। गांव झोनोवाल में संजीव शर्मा द्वारा श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन करवाया जा रहा है। जिसके पहले दिन आज पहले दिन संत बाबा बाल जी महाराज ने पधार कर संगत को आशीर्वाद दिया। श्रीमद भागवत कथा के पहले दिन कथावाचक आनंदचेतन जी महाराज ने कथा करते हुए उपस्थित भक्तजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पहले दिन आज धुंधकारी का उद्धार और मोक्ष के बारे में आनंद चेतन जी महाराज ने अपनी कथा में कहा कि धुंधकारी अपने कुकर्मों के कारण प्रेत योनि में चला गया था। उसके भाई गोकर्ण ने भागवत सप्ताह का आयोजन कर उसे इस कष्टकारी योनि से मुक्ति दिलाकर मोक्ष प्रदान किया। उन्हीनों ने बांस की सात गांठों का रहस्य के बारे विशेष रूप से बताया जाता है कि धुंधकारी ने बांस की एक गांठ में बैठकर कथा सुनी थी। सात दिनों की कथा के बाद बांस की सातों गांठें एक-एक कर फट गईं, जो अविद्या और पापों के विनाश का प्रतीक हैं, जिसके बाद धुंधकारी दिव्य रूप धारण कर बैकुंठ गया।
महाराज जी ने गोकर्ण के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे आत्मदेव ब्राह्मण के पुत्र थे और उनका जन्म गाय के कान से हुआ था, जिस कारण उनका नाम ‘गोकर्ण’ पड़ा। वे परम ज्ञानी और वैरागी थे। सात दिन की कथा की महत्ता के बारे में एक प्रसंग के माध्यम से महाराज जी यह संदेश देते हैं कि भागवत कथा में इतनी शक्ति है कि यह घोर पापियों का भी उद्धार कर सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि मनुष्य का जन्म और मृत्यु इन्ही सात दिनों (सोमवार से रविवार) के भीतर होती है, इसलिए सात दिन की कथा श्रवण से जीवन सफल हो जाता है।
इस दौरान लेक्चरार पवन शर्मा विशेष तौर पर मौजूद रहे।
