श्री अकाल तख्त साहिब के सामने शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह सिर झुका सकते है तो भगवंत मान क्यों नहीं : केवल सिंह ढिल्लों

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चंडीगढ़ : भाजपा पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि यदि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह अकाल तख्त साहिब के सामने सिर झुका सकते थे, तो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान क्यों नहीं?

क्या सत्ता का अहंकार गुरु की मर्यादा से भी बड़ा हो गया है? अकाल तख्त साहिब का सम्मान और प्रतिष्ठा किसी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी से ऊँची है—आज भी, कल भी और हमेशा रहेगी।

ढिल्लों ने कहा कि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह वह महान शासक थे, जिनके नाम से अफगान और मुगल भी कांपते थे तथा जिनके नेतृत्व में पंजाब एक शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में उभरा। लेकिन जब अकाल तख्त साहिब ने उन्हें तलब किया, तो वे एक सम्राट के रूप में नहीं बल्कि गुरु घर के विनम्र सेवक के रूप में उपस्थित हुए।

उन्होंने कहा कि जत्थेदार अकाली बाबा फूला सिंह जी ने महाराजा रणजीत सिंह को तनखाहिया करार दिया था। महाराजा ने बिना किसी विरोध के उस दंड को स्वीकार किया और विनम्रतापूर्वक अपना सिर झुका दिया। उनकी इस अद्वितीय विनम्रता को देखकर संगत ने उन्हें क्षमा कर दिया। यही एक सच्चे शेर-ए-पंजाब की पहचान थी, जिसके लिए धर्म और पंथ हर प्रकार की राजनीतिक या राजसत्ता से ऊपर थे। केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि इसके बिल्कुल विपरीत, जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त साहिब द्वारा ‘गुरु-द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ करार दिया गया, तो उन्होंने विनम्रता दिखाने के बजाय इस फैसले को ‘राजनीतिक साजिश’ बताया। सिर झुकाने के बजाय उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार पर ही सवाल खड़े किए। इतना ही नहीं, केंद्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की रिपोर्टों को भी खारिज करने की कोशिश की गई। ढिल्लों ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन्होंने भी अकाल तख्त साहिब से टकराने की कोशिश की, उनका राजनीतिक और सामाजिक रूप से कभी भला नहीं हुआ। भगवंत मान को इतिहास से सबक लेना चाहिए।

 

 

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