श्री हरिमंदिर साहिब की प्रतिकृति प्रधानमंत्री से सांसद मनीष तिवारी ने न बेचने की अपील की : सुप्रीम कोर्ट में एसवाईएल के केस की प्रभावी ढंग से पैरवी करे पंजाब : सांसद मनीष तिवारी

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चंडीगढ़, 29 अक्तूबर: कांग्रेस के वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रवक्ता और श्री आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह श्री हरिमंदिर साहिब की प्रतिकृति न बेचें, जो उन्हें पीएम के रूप में सम्मान चिन्ह के तौर मिली थी।
उन्होंने पंजाब सरकार से सुप्रीम कोर्ट में एसवाईएल के लिए राज्य के केस का प्रभावी ढंग से बचाव करने के लिए सर्वश्रेष्ठ कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करने की भी सलाह दी है।
इस क्रम में, प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में तिवारी ने कहा कि श्री हरिमंदिर साहिब सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थल है। यह दुनिया भर में पंजाबियों के संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से श्री हरिमंदिर साहिब के मॉडल/प्रतिकृति की नीलामी तुरंत रोकने का आग्रह अपील करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री को बहुत सम्मान और श्रद्धा के साथ भेंट किया होगा।
जिस पर तिवारी ने प्रधानमंत्री को सुझाव दिया कि यदि वह इसे नहीं रख सकते हैं या नहीं रखना चाहते हैं, तो उन्हें (प्रधानमंत्री को) इसे उन्हें दे देना चाहिए, ताकि वह इसे श्री आनंदपुर साहिब में पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ रख सकें।
सांसद ने कहा कि हर चीज एक वस्तु की तरह बेचा या खरीदा नही जा सकता है। श्री हरिमिंदर साहिब की प्रतिकृति सभी पंजाबियों, सिख और हिंदू सबके लिए पवित्र और श्रद्धा योग्य है। इसे नीलामी में लगाना देश के सर्वोच्च कार्यकारी कार्यालय को शोभा नहीं देता।
जबकि एसवाईएल सहित पंजाब के विभिन्न मुद्दों पर राज्य सरकार द्वारा एक नवंबर को आयोजित की जाने वाली प्रस्तावित बहस का जिक्र करते हुए, तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में बहस और चर्चा करना अच्छी बात है, लेकिन सरकार देश के सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे केस में बचाव के लिए अपनी ऊर्जा और संसाधन खर्च करने चाहिए।
उन्होंने बताया कि मामला शीर्ष अदालत में लंबित है, जहां पंजाब सरकार को इसका मजबूती से बचाव करने की जरूरत है, जो फिलहाल होता नहीं दिख रहा है। सर्वोच्च न्यायालय को पंजाब के दृष्टिकोण की सराहना करने की आवश्यकता है, जिसके पास पानी की एक बूंद भी नहीं है, जो हरियाणा या किसी अन्य राज्य को दिया जा सके, क्योंकि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है। एक ऊपरी रिपेरियन राज्य होने के नाते निचले तटवर्ती राज्यों की अनिवार्यताएं लागू होने से पहले इसकी ज़रूरतें पूरी की जानी चाहिए।

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