एएम नाथ : मंडी । एक समोसे के हेरफेर होने पर सीआइडी की जांच करवाने वाले और राहुल गांधी का बस में वीडियो चलाने वाले चालक-परिचालक पर कार्रवाई करने वाले मुख्यमंत्री चेस्टर हिल में 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले पर खामोश क्यों हैं।
आखिर उनकी क्या विवशता है कि उन्हें हास्यप्रद जवाब देने पड़ रहे हैं। यह बात नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शनिवार को मंडी में पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को आपस में लड़ाकर वह अपना कौन सा काम निकालना चाहते हैं। मुख्यमंत्री कोई जानकारी होने से कैसे इन्कार कर रहे हैं।
कार्रवाई के बजाय सचिवालय क्यों भेजी फाइल
रिपोर्ट के आधार पर यह साफ हुआ है कि मामले की शिकायत के बाद तहसीलदार द्वारा दो बार जांच कर रिपोर्ट दी गई और दोनों बार धारा-118 के उल्लंघन का आरोप लगा। सब-डिविजनल आफिसर सोलन की जांच में जो सवाल खड़े किए और निष्कर्ष निकाला, उस आधार पर उपायुक्त द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिए थी। आरोपितों पर कार्रवाई करने व चल रहे अवैध निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के बजाय जिला उपायुक्त ने फाइल को राज्य सचिवालय क्यों भेजा? जबकि उन्हें स्वयं कार्रवाई करनी चाहिए थी।
जमीन मालिक को लोन दिलाने और उसकी किश्त भरने का काम वह कंपनी कर रही है, जो चेस्टर हिल के पहले के प्रोजेक्ट्स बना चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि एसडीओ द्वारा कार्रवाई करने की रिपोर्ट लगाई गई तो यदि उससे कोई पक्ष असंतुष्ट होता तो उसके पास न्यायालय जाने का अधिकार था। इस मामले को उपायुक्त द्वारा अनावश्यक रूप से उच्च अधिकारियों को प्रेषित करना समझ के परे है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि पता चला है कि डंपिंग साइट की ऊंचाई 125 से 150 फीट हो गई। अवैध डंपिंग के कारण गांव के पानी के प्राकृतिक स्रोत बंद हो गए। भवन की ऊंचाई 25 से 35 मीटर बन गई, जिसे गिराने के आदेश थे, जिन पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।। बाखली रोप-वे को मात्र 27 लाख रुपये के वार्षिक लीज पर निजी फर्म को देने और उसके द्वारा किराया बढ़ाने पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह गंभीर विषय है और इससे करीब 14 पंचायतें प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को स्वयं देखेंगे। वहीं बीबीएमबी 90 लाख रुपये बाखली खड्ड पर पुल बनाने के लिए खर्च करेगा। उन्होंने यह मामला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से उठाया था।
