पुलिस भर्ती, प्री-नर्सरी शिक्षक भर्ती और आउटसोर्स नियुक्तियों में अनियमितताओं के लगाए आरोप
सीबीआई रिपोर्ट दबाने और सरकारी नौकरियों की संख्या घटाने को लेकर भी सरकार पर साधा निशाना
एएम नाथ। शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी सरकार झूठ बोलकर प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। शिमला से जारी बयान में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यह दावा करते हैं कि उनकी सरकार में कोई पेपर लीक नहीं हुआ, जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार ने नियमित भर्तियां ही नहीं करवाईं। उन्होंने कहा कि प्री-नर्सरी टीचर भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद प्रक्रिया रोकनी पड़ी, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और कई स्थानों पर शिक्षकों की व्यवस्था अभिभावकों व स्थानीय लोगों को अपने स्तर पर करनी पड़ी।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि चिकित्सा अधिकारियों और नर्सों की भर्ती के लिए आउटसोर्स कंपनियों का सहारा लिया गया, जिस पर उच्च न्यायालय ने भी कड़ी टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत होने वाली इन भर्तियों में भी अनियमितताओं के आरोप लगे और कई बार भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के मंत्री सार्वजनिक मंचों से अपने क्षेत्रों में सिफारिश के आधार पर नौकरियां दिलाने की बातें करते हैं।
उन्होंने हाल ही में हुई पुलिस भर्ती परीक्षा का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि अभ्यर्थियों ने मास चीटिंग के गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस की कार्रवाई में पेपर बेचने और खरीदने के आरोपियों की गिरफ्तारी, लेन-देन के रिकॉर्ड और नकदी बरामद होने के बावजूद सरकार ने मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की और जांच ठंडे बस्ते में डाल दी।
जयराम ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस भर्ती पेपर लीक का मामला सामने आते ही तत्काल एफआईआर दर्ज कर एसआईटी बनाई गई, परीक्षा रद्द की गई और सीबीआई जांच की सिफारिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई ने जांच पूरी कर कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की, लेकिन वर्तमान सरकार ने रिपोर्ट दो वर्षों तक दबाकर रखी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद सरकार का वास्तविक चेहरा सामने आया।
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि वर्ष 2022 में प्रदेश में 1.90 लाख से अधिक स्थायी सरकारी कर्मचारी थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 1.75 लाख रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थायी नौकरियां देने के बजाय आउटसोर्स व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है और युवाओं के साथ किए गए वादे पूरे करने में विफल रही है।
