सरकारी स्कूलों के बच्चों को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना बंद करे पंजाब सरकार….शिक्षा को प्रचार का अड्डा बनाने की बजाय वास्तविक प्राथमिकता दे सरकार – डी.टी.एफ.

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गढ़शंकर, 21 जुलाई। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डी.टी.एफ.) पंजाब ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के माध्यम से सरकार का राजनीतिक प्रचार किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है। डी.टी.एफ. के प्रदेश अध्यक्ष विक्रमदेव सिंह, महासचिव महिंदर कौड़ियांवाली, प्रदेश संयुक्त सचिव मुकेश कुमार तथा जिला अध्यक्ष सुखदेव डानसीवाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि डायरेक्टर स्कूल शिक्षा, पंजाब द्वारा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के प्रमुखों को पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों से 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बैग प्राप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। इन बैगों पर मुख्यमंत्री की तस्वीर छपी हुई है और उनका रंग भी सत्तारूढ़ पार्टी के झंडे से मेल खाता है। इसी प्रकार पहली से दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए भी बी.पी.ई.ओ. कार्यालयों के माध्यम से मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले पॉलीथीन के लिफाफे स्कूलों को भेजे गए हैं। नेताओं ने कहा कि सरकारी स्कूल किसी भी राजनीतिक पार्टी के प्रचार केंद्र नहीं हैं। सरकारी खजाने से खरीदी गई सामग्री का उपयोग विद्यार्थियों के माध्यम से राजनीतिक छवि चमकाने के लिए करना लोकतांत्रिक और शैक्षिक मूल्यों के विरुद्ध है। शैक्षणिक संस्थानों को पार्टी प्रचार से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार “शिक्षा क्रांति” के दावे कर रही है, लेकिन दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। राज्य के लगभग 60 प्रतिशत यानी 1100 से अधिक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और सैकड़ों हाई स्कूल आज भी प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों के बिना चल रहे हैं। 100 से अधिक ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों के पद खाली हैं। शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ रही है और वर्तमान सरकार अपने कार्यकाल के दौरान आवश्यकता के अनुसार नियमित शिक्षकों की नई भर्ती का विज्ञापन जारी कर भर्ती पूरी करने में असफल रही है। हजारों शिक्षकों से पहले कराई गई ड्रग जनगणना, जनसंख्या गणना और चुनाव ड्यूटियों के अलावा वर्तमान समय में 35 हजार से अधिक शिक्षक एस.आई.आर. के कार्य के लिए स्कूलों से बाहर लगाए गए हैं, जिसके कारण शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही दो वर्ष पहले पंजाब कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पंजाब की अपनी शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने की दिशा में भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

डी.टी.एफ. नेताओं मनजीत सिंह दसूहा, इंद्रसुखदीप सिंह ओडरा, बलजीत सिंह, अशनी कुमार, विनय कुमार और जसविंदर सिंह ने कहा कि जब विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पूरा शिक्षक स्टाफ और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, उस समय सरकार का ध्यान शिक्षा सुधारों की बजाय अपने राजनीतिक प्रचार पर अधिक केंद्रित है। यह प्राथमिकताओं के स्तर पर गंभीर लापरवाही है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर सरकार कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डी.ए.) रोकने के लिए अदालतों में महंगे वकीलों की फौज खड़ी करती है, जबकि दूसरी ओर सरकारी धन को राजनीतिक प्रचार सामग्री पर खर्च करके लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। डी.टी.एफ. ने पंजाब सरकार से मांग की कि सरकारी स्कूलों और विद्यार्थियों को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना तुरंत बंद किया जाए। स्कूलों के खाली पद भरे जाएँ, शिक्षकों की नियमित भर्ती की जाए, स्कूलों में आवश्यक बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराया जाए और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।

फोटो : बैगों पर मुख्यमंत्री की छपी हुई तस्वीर और बैग का रंग भी आम आदमी पार्टी के झंडे से मेल खाता हुआ।

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