सरकारी स्कूलों में शिक्षक की कमी नहीं रोकेगी पढ़ाई ; 350 स्कूलों में शुरू हुई वर्चुअल कक्षाएं

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एक स्कूल के विषय विशेषज्ञ शिक्षक दूसरे स्कूल के विद्यार्थियों को भी देंगे ऑनलाइन शिक्षा, स्थायी नियुक्ति होने तक रहेगी व्यवस्था

एएम नाथ । शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। अब किसी स्कूल में विषय शिक्षक के सेवानिवृत्त होने, तबादले, पदोन्नति या लंबी छुट्टी पर जाने से कक्षा खाली रहती है तो दूसरे स्कूल के शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे। इस पहल के तहत अब तक प्रदेश के 350 स्कूलों को वर्चुअल कक्षाओं से जोड़ा जा चुका है।

शिमला में प्रयोग सफल, दूसरे जिलों तक पहुंची योजना

शिक्षा विभाग ने करीब एक साल पहले शिमला जिले के कुछ स्कूलों में प्रायोगिक तौर पर यह व्यवस्था शुरू की थी। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद बिलासपुर, ऊना और हमीरपुर सहित अन्य जिलों के स्कूलों को भी इसमें शामिल किया गया। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली के अनुसार, इस पहल से विद्यार्थियों की पढ़ाई को निरंतर जारी रखने में मदद मिल रही है।

एक स्कूल से दूसरे स्कूल तक पहुंचेगी विषय विशेषज्ञ की कक्षा

शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों की ट्विनिंग यानी आपसी संबद्धता के तहत चयनित विद्यालयों को ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार, जिस स्कूल में किसी विषय का शिक्षक उपलब्ध है, वह अपनी निर्धारित समयसारिणी के अनुसार संबद्ध स्कूल के विद्यार्थियों को भी ऑनलाइन पढ़ाएगा। इससे शिक्षक की कमी वाले स्कूलों में भी संबंधित विषय की पढ़ाई जारी रह सकेगी।

एसएमसी शिक्षकों के बजाय तकनीक पर जोर

शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए पहले कई स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के माध्यम से अस्थायी शिक्षक रखने की व्यवस्था अपनाई जाती थी। सरकार की ओर से अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाए जाने के बाद वर्चुअल कक्षाओं को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन पढ़ाई नियमित शिक्षक की नियुक्ति का स्थायी विकल्प नहीं होगी। संबंधित विषय के शिक्षक की तैनाती होने तक ही यह व्यवस्था लागू रहेगी।

प्रधानाचार्य करेंगे व्यवस्था की निगरानी

वर्चुअल कक्षाओं को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को दी गई है। ऑनलाइन व्याख्यान के दौरान निगरानी के लिए अधिकारी नामित किए जाएंगे और एसएमसी को भी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। यदि किसी स्कूल में ऑनलाइन कक्षाओं के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं हैं तो प्रधानाचार्य निर्धारित नियमों के अनुसार उनकी खरीद कर सकेंगे। फिलहाल उन्हीं स्कूलों को इस योजना में शामिल किया गया है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर है।

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