सरपंच को सता रहा हादसे का डर, रेल आने पर खुद फाटक खोलते और बंद करते : गांव बसियाला से गुजरने वाली रेल लाइन पर रेलवे फाटक पर सरपंच गुरदेव सिंह हरी झंडी लेकर रेल को निकलने करते है इशारा

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गढ़शंकर। गांव बसियाला में रेलवे फाटक पर सरपंच गुरदेव सिंह खुद मोर्चा संभालते हुए रोजाना रेल के आने पर फाटक खोलते और बंद करते है। गांव वासियों द्वारा बिभिन्न पार्टियों के नेताओं व अधिकारीयों को ज्ञापन सौपें।  लेकिन रेलवे विभाग ने कोई कर्मचारी तैनात नहीं किया। लिहाजा गांव वासियों को भारी परेशानी का साहमना करना पड़ रहा है।
राहों से जैजों दोआबा को जाने के लिए गांव बसियाला से रेलवे लाइन निकलती है। वहां पर पहले रेल लाइन से निकलता रास्ता रेलवे ने बंद कर दिया था। फिर गांव वासियों ने काफी संघर्ष किया तो रास्ता खोल दिया लेकिन फाटक नहीं लगाया।  जिसके बाद गांव वासियों ने पैसे इकठे कर यह फाटक फाटक तो लगा दिया। लेकिन गांव की पंचायत व लोगों द्वारा बार बार बिभिन्न राजनितिक पार्टियों के नेताओं ने बिभिन्न अधिकारीयों को फाटक पर रेलवे द्वारा कर्मचारी तैनात करवाने की मांग की।  लेकिन अभी तक रेलवे ने अभी तक कर्मचारी तैनात नहीं किया है। जिसके चलते गांव बसियाला व रसूलपुर के लोगों को भारी परेशानी का साहमना करना पड़ता है और रेलवे फाटक पर कर्मचारी तैनात न होने से रेल के आने पर हादसे का खतरा बना रहता है। हालांकि भाजपा के पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना गत दिनों केंद्र के राज्य रेलवे मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से मिलकर बसियाला रेलवे फाटक पर कर्मचारी तैनात करने की मांग की थी। जिस पर केन्द्री राज्य मातृ रवनीत बिट्टू ने शीध्र टीम भेज कर मुआयना कर कर्मचारी तैनात क्र दिया जाएगा।

गांव के सरपंच गुरदेव सिंह किसी अनहोनी के डर से आपने कामकाज छोड़ कर रोजाना रेल के गुजरने दौरान फाटक बंद करता और खोलता है और हाथ में रेलवे कर्मचारी की तरह हाथ में हरी झंडी पकड़े रेल को निकलने का इशारा करता है।
सरपंच गुरदेव सिंह : मुझे डर रहता है के रेल लाइन पर रेल आने पर कोई हादसा जाए। जिसके चलते मैं दूकान का काम छोड़ कर रेल के यहां से गुजरने के दौरान चार घंटे फाटक खोलने और बंद करने में गुजरते है। हमने बहुत बार बिभिन्न नेताओं व अधिकारीयों को मांग पत्र देकर रेलवे से कर्मचारी तैनात करवाने के मांग कर चुके है। हमें एक रास्ता यहां से रेलवे ने दिया है जो नवांशहर के गांव मुबारिकपुर में निकलता है। जबकि हमारे गांव बसियाला व रसूलपुर गढ़शंकर में पड़ते है। इसके इलावा यह रास्ता दोपहर और शाम के समय महिलाओं के अकेले आने जाने के लिए तो खतरनाक है। गन्ने की ट्रॉलियां भी इस रास्ते से नहीं निकल सकती। गांव वासियों के फाटक पर पहले एक व्यक्ति दस हजार सैलरी पर रखा था। वह भी काम छोड़ गया। उसके बाद से मैं खुद ही फाटक खोलने बंद करने का काम करता हूँ।

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