सीटू चंबा ने मजदूर आंदोलन के दमन की कड़ी निंदा की : नोएडा-गुरुग्राम से शुरू हुआ आंदोलन कई राज्यों तक फैला : सुदेश ठाकुर

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त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने और गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई की मांग

एएम नाथ। चंबा : सीटू जिला कमेटी चंबा ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा की भाजपा सरकारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और एनसीआर क्षेत्र में चल रहे मजदूर आंदोलनों को दमन और उत्पीड़न के जरिए कुचलने की कड़ी निंदा की है। कमेटी ने उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें इन आंदोलनों को बाहरी ताकतों से प्रेरित और मजदूरों को राष्ट्र विरोधी बताया जा रहा है।
सीटू के जिला महासचिव सुदेश ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2014 से मजदूरों के न्यूनतम वेतन में कोई ठोस बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि लेबर कोड लागू करने के नाम पर मजदूरों से बड़े वादे किए गए थे, जैसे 12 घंटे काम पर ओवरटाइम, समय पर वेतन और वेतन वृद्धि, लेकिन वास्तविकता में मजदूरों को कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यह सभी घोषणाएं सिर्फ कागजी साबित हुई हैं।
उन्होंने बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मजदूरों का शोषण हो रहा है। श्रम कानूनों की खुलेआम अनदेखी करते हुए उद्योग मालिक अपने मुनाफे को बढ़ाने में लगे हैं, जबकि मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। इसी शोषण के खिलाफ मजदूरों का गुस्सा अब फैक्ट्री परिसरों से निकलकर सड़कों पर आ गया है और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर व्यापक आंदोलन शुरू कर दिया है।
सीटू के अनुसार यह आंदोलन धीरे-धीरे एक फैक्ट्री से दूसरी फैक्ट्री और फिर पूरे औद्योगिक क्षेत्र में फैल गया। सरकार ने इसे दबाने के लिए मजदूरों की गिरफ्तारी, यूनियन नेताओं को जेल भेजने और कई जगह नजरबंद करने जैसे कदम उठाए हैं। इससे मजदूरों को संगठित नेतृत्व नहीं मिल पा रहा, जिसके कारण आंदोलन की दिशा भी स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
सुदेश ठाकुर ने कहा कि मजदूर किसी एक नेता का नाम सामने लाने से भी बच रहे हैं, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह आंदोलन अब उत्तर प्रदेश और हरियाणा से निकलकर बिहार, राजस्थान और गुजरात तक फैल चुका है, जो मजदूरों के व्यापक असंतोष को दर्शाता है।
सीटू ने सरकार से मांग की है कि गिरफ्तार मजदूरों और ट्रेड यूनियन नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही एक त्रिपक्षीय वार्ता बुलाई जाए, जिसमें सरकार, उद्योग प्रबंधन और ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, ताकि इस औद्योगिक विवाद का समाधान निकाला जा सके।
जिला कमेटी ने चंबा की सभी यूनियनों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रदर्शन, गेट मीटिंग, रैली और जनसभाएं आयोजित कर इस आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त करें और मजदूरों के संघर्ष को मजबूत करें।

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